राजस्थान की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर ‘ओरण’ (पवित्र उपवन और चारागाह) को बचाने के लिए पिछले कई महीनों से जारी संघर्ष आज राजधानी जयपुर की सड़कों पर दिखाई दिया। जैसलमेर के तनोट माता मंदिर से 21 जनवरी को शुरू हुई यह ‘ओरण बचाओ पदयात्रा’ करीब 700 किलोमीटर का सफर तय कर जयपुर पहुंची।
हालांकि, मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को जयपुर पुलिस ने सीकर रोड स्थित भवानी निकेतन के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान पुलिस और पदयात्रियों के बीच हल्की झड़प भी हुई, जिससे माहौल गरमा गया।
विधायक रविंद्र सिंह भाटी का सरकार पर तीखा प्रहार
पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे शिव (बाड़मेर) से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
- युद्ध नायकों का अपमान: “जैसलमेर की सीमा से वे बुजुर्ग जयपुर आए हैं जिन्होंने 1965 और 1971 के युद्ध में देश के लिए खून बहाया। आज उन्हें अपनी जमीन और पर्यावरण के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, यह शर्मनाक है।”
- राजस्व रिकॉर्ड का मुद्दा: भाटी ने मांग की कि ‘ओरण’ भूमि को तत्काल राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) में दर्ज किया जाए। वर्तमान में रिकॉर्ड में दर्ज न होने के कारण मल्टीनेशनल कंपनियां और भू-माफिया इन पर कब्जा कर रहे हैं।
- खोखले वादे: सरकार ने सदन में खेजड़ी संरक्षण और ओरण सुरक्षा को लेकर बिल लाने का वादा किया था, जो अब तक धरातल पर नहीं उतरा है।
तनोट से जयपुर: कड़ाके की ठंड से भीषण गर्मी तक का सफर
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि यह कोई साधारण रैली नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति उनकी आस्था की परीक्षा है।
“हम 21 जनवरी से चल रहे हैं। हमने कड़ाके की ठंड देखी और अब 2026 की यह भीषण गर्मी झेल रहे हैं। हमारे पैर नंगे हैं, लेकिन इरादे अटल हैं। जब तक ओरण, गोचर, खेजड़ी और हमारे जल स्रोतों (नदी-तालाब) को कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती, हम पीछे नहीं हटेंगे।”
आंदोलन की प्रमुख मांगें:
- समस्त ओरण और गोचर भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में ‘ओरण’ के नाम से ही दर्ज किया जाए।
- सीमावर्ती क्षेत्रों में सौर ऊर्जा और अन्य मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण पर तुरंत रोक लगे।
- खेजड़ी वृक्ष संरक्षण के लिए कड़ा कानून (बिल) तुरंत लागू हो।
- पारंपरिक जल स्रोतों (नाडी, तालाब) का पुनरुद्धार और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
चेतावनी: “यह तो सिर्फ ट्रेलर है”
विधायक भाटी और अन्य प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने जल्द ही प्रतिनिधिमंडल से वार्ता कर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो जयपुर में एक अभूतपूर्व जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा। “जय जय जैसाण” के नारों के साथ प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे खाली हाथ वापस नहीं लौटेंगे।