साक्षी चौधरी कौन हैं? जानिए निखत जरीन को हराने वाली इंडियन आर्मी की बॉक्सर की पूरी कहानी

25 वर्षीय साक्षी चौधरी भारतीय सेना (Indian Army) की एक होनहार मुक्केबाज हैं, जिन्होंने पटियाला में हुए राष्ट्रीय चयन ट्रायल में दो बार की वर्ल्ड चैंपियन निखत जरीन और मौजूदा विश्व चैंपियन मीनाक्षी हुड्डा को हराकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ‘जायंट-किलर’ के नाम से मशहूर हो रही साक्षी ने इस धमाकेदार जीत के साथ आगामी कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के लिए 51 किलोग्राम फ्लाईवेट डिवीजन में अपनी जगह पक्की कर ली है।

आइए जानते हैं हरियाणा के भिवानी से लेकर इंडियन आर्मी और फिर बॉक्सिंग रिंग में तहलका मचाने वाली इस युवा चैंपियन का पूरा सफर।

भिवानी की ‘नर्सरी’ में सीखी बॉक्सिंग की बारीकियां

साक्षी चौधरी का जन्म भारतीय मुक्केबाजी का गढ़ माने जाने वाले हरियाणा के भिवानी जिले के धनाना गांव में हुआ। कॉम्बैट स्पोर्ट्स की संस्कृति के बीच पली-बढ़ी साक्षी ने मशहूर भिवानी बॉक्सिंग क्लब में कोच जगदीश सिंह की देखरेख में अपने खेल को निखारा। यह वही प्रतिष्ठित क्लब है, जहां से भारत के पहले ओलंपिक बॉक्सिंग मेडलिस्ट विजेंदर सिंह निकले थे।

साक्षी अपनी बेहतरीन हाइट और शारीरिक बनावट के कारण शुरू से ही खास थीं। उन्होंने अपनी लंबाई का फायदा उठाते हुए ‘लॉन्ग-रेंज एमेच्योर बॉक्सिंग’ में महारत हासिल की, जहां वह अपने शानदार फुटवर्क और अचूक ‘लेफ्ट जैब’ से बिना मार खाए विरोधियों पर हावी रहती हैं।

जूनियर लेवल की चैंपियन और फिर चोट का ग्रहण

साक्षी कोई नया नाम नहीं हैं, बल्कि वह एक दशक पहले ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी थीं। 2015 एआईबीए (AIBA) वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप जीतने के बाद, साक्षी ने 2017 और 2018 में लगातार वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल हासिल किया। दिलचस्प बात यह है कि अपने यूथ करियर में साक्षी ने जापान की सेना इरी को भी मात दी थी, जो बाद में टोक्यो ओलंपिक की गोल्ड मेडलिस्ट बनीं।

करियर जब उड़ान भर रहा था, तभी 2022 में कंधे की एक गंभीर चोट ने सब कुछ रोक दिया। साक्षी महीनों तक रिंग से बाहर हो गईं और पिछले कॉमनवेल्थ व एशियन गेम्स में भी हिस्सा नहीं ले पाईं। एक समय ऐसा लगा कि इस उभरती हुई चैंपियन का करियर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

इंडियन आर्मी का मिला साथ और हुई शानदार वापसी

साक्षी की जिंदगी का टर्निंग पॉइंट दिसंबर 2022 में आया, जब उन्हें भारतीय सेना के ‘मिशन ओलंपिक कार्यक्रम’ के तहत शामिल किया गया। कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस (CMP) में हवलदार के पद पर तैनात साक्षी को सेना की ओर से बेहतरीन मेडिकल केयर और विश्व स्तरीय ट्रेनिंग सुविधाएं मिलीं। इस सहयोग से उन्होंने चोट से पूरी तरह उबर कर वापसी की और कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित 2025 विश्व मुक्केबाजी कप (54 किग्रा वर्ग) में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतकर अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया।

51 किग्रा का वह ‘मास्टरस्ट्रोक’ जिसने निखत जरीन को चौंकाया

54 किग्रा में अपनी सफलता के बावजूद, साक्षी और उनके कोच ने पटियाला ट्रायल से ठीक पहले एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया। उन्होंने 51 किलोग्राम (फ्लाईवेट डिवीजन) में उतरने का फैसला किया। वजन घटाना बेहद मुश्किल था, लेकिन इस रणनीति ने साक्षी को पारंपरिक फ्लाईवेट मुक्केबाजों के खिलाफ हाइट और रीच (Reach) का जबरदस्त फायदा दिया।

निखत जरीन के खिलाफ हुए मुकाबले में साक्षी की यही शारीरिक बढ़त उनका सबसे बड़ा हथियार साबित हुई। साक्षी ने अपने अचूक और लगातार ‘लेफ्ट जैब’ से वर्ल्ड चैंपियन को खुद से दूर रखा और अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए भारतीय मुक्केबाजी में एक नए युग की शुरुआत कर दी।

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