जम्मू-कश्मीर की 16 वर्षीय शीतल देवी की कहानी अदम्य इच्छाशक्ति, असाधारण प्रतिभा और असंभव को संभव कर दिखाने का एक जीवंत प्रमाण है। वह Phocomelia नामक एक दुर्लभ चिकित्सा स्थिति के साथ पैदा हुईं, जिसके कारण उनके पास जन्म से ही दोनों हाथ नहीं हैं। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय, दुनिया के सामने एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसने न केवल भारत का सिर ऊंचा किया, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी एक खास पहचान बनाई है। वह दुनिया की एकमात्र ज्ञात बिना हाथों वाली महिला तीरंदाज हैं।

शीतल तीरंदाजी में रुचि दिखाई और अपने पैरों, कंधे और ठुड्डी का उपयोग करके तीर चलाने की अपनी एक अनूठी और असाधारण तकनीक विकसित की। वह धनुष को अपने एक पैर से पकड़ती हैं और दूसरे कंधे व ठुड्डी की मदद से प्रत्यंचा को खींचकर निशाना साधती हैं। उन्होंने यह तकनीक कोच कुलदीप वेदवान और अभिलाषा चौधरी के मार्गदर्शन में 2022 में शुरू की। उनकी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिणाम जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखने लगा। कम्पाउंड महिला ओपन रैंकिंग में शीतल विश्व नंबर 1 स्थान पर पहुँच गईं। (तथ्यात्मक जानकारी को अधिकतम करते हुए)।
उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिणाम जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखने लगा। 2022 एशियाई पैरा खेलों (हांग्जो, चीन में 2023 में आयोजित) में शीतल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन पदक अपने नाम किए। उन्होंने महिलाओं के व्यक्तिगत कम्पाउंड ओपन और मिक्स्ड टीम कम्पाउंड ओपन में दो स्वर्ण पदक और महिलाओं के टीम कम्पाउंड ओपन में एक रजत पदक जीता। (पूरी जानकारी वाले तथ्य)। यह उपलब्धि पाने वाली वे पहली भारतीय खिलाड़ी हैं। यह न केवल उनके व्यक्तिगत कौशल का प्रदर्शन था, बल्कि भारत में पैरा-खेलों के लिए भी एक ऐतिहासिक क्षण था। उन्होंने एकल संस्करण में दो स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रचा। (सटीक जानकारी)।
शीतल की इस असाधारण प्रतिभा और विश्व स्तर पर उनके प्रेरणादायक प्रदर्शन को देखते हुए विश्व तीरंदाजी संघ ने उन्हें 2023 के लिए ‘साल की सर्वश्रेष्ठ पैरा तीरंदाज (कम्पाउंड महिला)’ चुना है। यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान पाने वाली वह पहली भारतीय तीरंदाज (पैरा या सक्षम) हैं। यह सम्मान उनकी निरंतरता, कड़ी मेहनत और उस अदम्य साहस का प्रमाण है, जिसने उन्हें दुनिया के सामने एक अलग पहचान दिलाई है। उनकी उपलब्धि भारत और दुनिया भर के पैरा-एथलीटों के लिए एक नया मानदंड स्थापित करती है।
Sheetal Devi Named World Archery Para Archer of the Year, First Indian to Win This Award
