जयपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जयपुर प्रांत का संघ शिक्षा वर्ग शुक्रवार को जामडोली स्थित दामोदर दास डालमिया आदर्श विद्या मंदिर में संपन्न हुआ। इस अवसर पर आयोजित समापन समारोह में स्वयंसेवकों ने 15 दिनों तक सीखे गए शारीरिक और बौद्धिक कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संघ के प्रांत प्रचारक बाबूलाल उपस्थित रहे, जिन्होंने भारतीय संस्कृति और समाज के वर्तमान परिदृश्य पर अपने विचार रखे।

‘संयुक्त परिवार और तीन संतानों से बचेगा देश का यौवन’
समारोह को संबोधित करते हुए प्रांत प्रचारक बाबूलाल ने परिवार व्यवस्था पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को हमेशा ‘युवा’ बनाए रखने के लिए हमारी परिवार व्यवस्था का सुदृढ़ होना बहुत जरूरी है। उन्होंने आह्वान किया कि एक परिवार में कम से कम तीन संतानें होनी चाहिए। साथ ही, हमें संयुक्त परिवारों (Joint Families) की अपनी पुरातन मर्यादाओं और परंपराओं को फिर से जीवित करना होगा, ताकि हमारी संस्कृति और संस्कार नई पीढ़ी में सुरक्षित रह सकें। व्यक्तिगत और पारिवारिक प्रयासों से ही भारत फिर से विश्व गुरु के पद पर आसीन होगा।
पर्यावरण की चिंता: ‘AC का अत्यधिक उपयोग घटाएं’
प्रांत प्रचारक ने पर्यावरण संरक्षण का भी उल्लेख किया। उन्होंने संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की सीख देते हुए कहा कि आज वातानुकूलित (AC) का अत्यधिक उपयोग कार्बन उत्सर्जन को बढ़ा रहा है, जिसे नियंत्रित करना समय की सबसे बड़ी मांग है। इसके साथ ही उन्होंने नागरिकों से देश के नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भाषा, वेशभूषा और स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर अपने ‘स्वत्व’ (Self-identity) को जागृत करना चाहिए।
भेदभाव सनातन परंपरा नहीं: समरस समाज की अपील
सामाजिक समरसता पर बोलते हुए बाबूलाल ने स्पष्ट किया कि जाति, भाषा, खान-पान या पूजा पद्धति के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव हमारी सनातन परंपरा का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें मनुष्य को केवल मनुष्य के रूप में स्वीकार कर एक समरस और एकजुट समाज का निर्माण करना होगा।
‘संघ ने किया सनातन संस्कृति को मजबूत’
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित नाथ सम्प्रदाय के संत बस्तीनाथ ने कहा कि पूरी दुनिया में सनातन समाज को संगठित करने का सबसे बड़ा कार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने किया है। संघ ने भारत को एक सूत्र में बांधते हुए सनातन संस्कृति की जड़ों को गहराई तक मजबूत किया है। वहीं, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त मेजर जनरल तेजिंदर आहलुवालिया ने स्वयंसेवकों के कड़े अनुशासन और शारीरिक प्रदर्शन की जमकर सराहना की। उन्होंने युवाओं को जीवन में ईमानदारी, अनुशासन और निष्पक्षता के साथ कार्य करने का संदेश दिया।
24 जिलों के 316 युवाओं ने लिया प्रशिक्षण
गौरतलब है कि जयपुर प्रांत के 24 जिलों के कॉलेज विद्यार्थियों और युवा व्यवसायियों के लिए यह प्रशिक्षण वर्ग 21 मई 2026 को शुरू हुआ था। इस शिविर में कुल 316 शिक्षार्थियों ने अपना प्रशिक्षण पूरा किया। वर्ग की सुचारू व्यवस्था के लिए 37 शारीरिक शिक्षकों और 42 प्रबंधकों ने पूर्णकालिक रूप से अपना दायित्व निभाया। इस 15 दिवसीय वर्ग के दौरान अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर और अखिल भारतीय सह-प्रचारक प्रमुख अरुण जैन का भी विशेष प्रवास रहा, जिन्होंने स्वयंसेवकों की जिज्ञासाओं का समाधान किया और उनके साथ परिचय सत्र में भाग लिया।