सुबह 4:15 बजे जागरण, खुद साफ करते हैं बर्तन… जानिए RSS के ‘विशेष’ शिक्षा वर्ग के अंदर क्या-क्या होता है?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh – RSS) केवल एक संगठन नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण का एक पूरा तंत्र है। इसका एक जीवंत उदाहरण इन दिनों राजस्थान के अलवर (Alwar) में देखने को मिल रहा है। शहर के मालवीय नगर स्थित आदर्श विद्या मंदिर में 21 मई से 5 जून तक संघ का एक विशेष ‘संघ शिक्षा वर्ग’ (Sangh Shiksha Varg) संचालित किया जा रहा है। यह कोई सामान्य शिविर नहीं है, बल्कि 40 से 65 वर्ष आयु वर्ग के स्वयंसेवकों के लिए आयोजित अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभावना के संस्कारों की एक व्यापक कार्यशाला है। इस वर्ग में जयपुर प्रांत (Jaipur Prant) के विभिन्न जिलों से आए 167 स्वयंसेवक एक साथ रहकर जीवन निर्माण का कड़ा प्रशिक्षण ले रहे हैं।

संस्कारों और समरसता की व्यापक कार्यशाला (Workshop on Social Harmony & Values)

इस प्रशिक्षण वर्ग में स्वयंसेवकों को एक सुव्यवस्थित और अनुशासित जीवनचर्या (Disciplined Lifestyle) के सांचे में ढाला जा रहा है। यहां उन्हें केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता (Social Harmony), श्रम साधना, राष्ट्रभक्ति और नैतिक मूल्यों को जीवन में उतारने का गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्वयंसेवकों को समाज के वंचित वर्गों के प्रति सेवा भाव जगाने, जनसंपर्क (Public Relations) के व्यावहारिक कौशल और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए तैयार किया जा रहा है। वर्ग के विभिन्न बौद्धिक सत्रों (Intellectual Sessions) में पर्यावरण संरक्षण, गौसेवा, ग्राम विकास, धर्म जागरण और कुटुंब प्रबोधन जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और ज्वलंत विषयों पर विशेष मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

सीटी बजते ही बदलती है दिनचर्या (Strict Time Management & Daily Routine)

संघ शिक्षा वर्ग की पूरी दिनचर्या समयबद्धता और अनुशासन का एक बेजोड़ उदाहरण है। यहां किसी को आवाज देकर नहीं बुलाया जाता, बल्कि सभी सूचनाएं और कालांश (Period) का परिवर्तन केवल एक सीटी (Whistle) के माध्यम से होता है। स्वयंसेवकों के दिन की शुरुआत प्रतिदिन प्रातः 4:15 बजे जागरण के साथ होती है। दैनिक नित्यकर्म के बाद सभी एक साथ सामूहिक रूप से एकात्म स्तोत्र (Ekatmata Stotra) का पाठ करते हैं। इसके बाद प्रातः 5:20 बजे से 6:30 बजे तक और फिर सायंकाल 6:15 बजे से 7:15 बजे तक ‘संघ स्थान’ लगता है। इस दौरान शारीरिक अभ्यास, खेलकूद, और विभिन्न बौद्धिक गतिविधियां संपन्न होती हैं। इसके अलावा सामूहिक योग एवं प्राणायाम का सत्र भी आयोजित किया जाता है, जिससे स्वयंसेवकों का वैचारिक व शारीरिक विकास (Physical Development) हो सके।

बिना भेदभाव सामूहिक भोजन और सांस्कृतिक संध्या (Community Dining & Cultural Programs)

शिविर में भोजन की व्यवस्था सामाजिक समरसता और समानता का सबसे बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करती है। दोपहर का भोजन 12:15 बजे और रात्रि का भोजन 8 बजे निर्धारित है। खास बात यह है कि यह भोजन समाज के विभिन्न वर्गों के घरों से बिना किसी जातिगत भेदभाव के बनकर आता है। सभी स्वयंसेवक एक पंगत में बैठकर सामूहिक रूप से इसे ग्रहण करते हैं। निर्धारित समय सीमा के भीतर भोजन संपन्न करना भी यहां के कड़े अनुशासन का हिस्सा है। वहीं, दिनभर की थकान के बाद रात 9 बजे से 10 बजे तक ‘प्रतिभा प्रकटीकरण’ और सांस्कृतिक कार्यक्रम (Cultural Programs) आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में देशभक्ति और भारतीय संस्कृति से जुड़े लोकगीत और प्रस्तुतियां शामिल होती हैं। रात 10 बजे शयन (Sleep) के साथ दिनचर्या का समापन हो जाता है।

स्वावलंबन और जल संरक्षण का अनूठा संदेश (Self-Reliance & Water Conservation)

इस संघ शिक्षा वर्ग में आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) और श्रम की गरिमा (Dignity of Labor) का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। यहां कोई वीआईपी (VIP) संस्कृति नहीं है। स्वयंसेवक अपने भोजन के बर्तन धोने से लेकर, कपड़े धोने, आवासीय कक्षों, बरामदों, मैदानों और यहां तक कि शौचालय व स्नानागारों की सफाई भी खुद ही करते हैं। सबसे खास बात यह है कि जल संरक्षण (Water Conservation) के उद्देश्य से बर्तनों को साफ करने के लिए पानी के बजाय बालू-रेत (Sand) का उपयोग किया जा रहा है। व्यवस्था की यह अनूठी पहल श्रम के महत्व, सेवा भाव और पर्यावरण संरक्षण (Environment Protection) के प्रति एक बड़ा संदेश देती है। इस शिविर के माध्यम से समाज और राष्ट्र के लिए एक ऐसा समर्पित नेतृत्व (Leadership Building) तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, जो राष्ट्र जीवन के हर आयाम के प्रति संवेदनशील हो।

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