राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग’: 1927 से अब तक का विस्तृत इतिहास, स्वरूप और अहम बदलाव

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण की व्यवस्था संगठन की स्थापना के समय से ही रही है। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी से लेकर वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के समय तक, इन वर्गों ने लाखों स्वयंसेवकों को राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता के लिए प्रशिक्षित किया है।

वर्ष 2026 के कार्यक्रम में उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला

शुरुआत और विकास यात्रा

  • स्थापना: संघ शिक्षा वर्ग की शुरुआत वर्ष 1927 में नागपुर में हुई थी। शुरुआत में यह तीन सप्ताह तक चलते थे और इन्हें ‘ग्रीष्मकालीन वर्ग’ कहा जाता था।
  • नामकरण: कुछ वर्षों बाद इनका नाम ‘अधिकारी शिक्षा वर्ग’ या ‘ऑफिसर ट्रेनिंग कैम्प’ (OTC) रखा गया। वर्ष 1950 में इन्हें ‘संघ शिक्षा वर्ग’ के नाम से जाना जाने लगा। वर्तमान में (2024 से) इनके स्वरूप में बदलाव कर इन्हें ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग’ का नाम दिया गया है।
  • प्रारंभिक व्यवस्था: शुरुआती वर्षों में नागपुर के स्थानीय विद्यालयों (लोकांचीशाला, धनवटे नगर विद्यालय, न्यू इंग्लिश स्कूल) में शिक्षार्थियों का निवास होता था और भोजन आसपास के घरों से आता था।
  • रेशमबाग का केंद्र: 1939 के आसपास ये वर्ग नागपुर के रेशमबाग में आयोजित होने लगे। यह भूमि डॉ. हेडगेवार ने मात्र ₹700 में खरीदी थी और आज तक यह आयोजन यहीं होता है।
  • सहयोग: इन वर्गों की सफलता में डॉ. हेडगेवार को अन्ना सोहनी और मार्तंडराव जोग का विशेष सहयोग मिला।

मई-जून में ही क्यों होते हैं आयोजन?

कार्यकर्ता विकास वर्ग 2026

यह वर्ग मुख्य रूप से मई और जून के महीने में लगाए जाते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि इन महीनों में विद्यालयों और महाविद्यालयों में ग्रीष्मावकाश रहता है, जिससे युवा बिना किसी शैक्षणिक बाधा के संघ की कार्यविधि से परिचित हो सकें।

कार्यक्रम की संरचना और अनुशासन

  • समय सारणी: प्रातः 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक वर्ग के कार्यक्रम चलते हैं। सुबह के 2-2.5 घंटे और शाम का 1.5 घंटा शारीरिक प्रशिक्षण को दिया जाता है। दोपहर 12:30 बजे से 5:00 बजे तक विश्राम, चर्चा और स्वयंसेवकों द्वारा टिप्पणियां लिखने का समय होता है।
  • आयु सीमा: प्रशिक्षण के दो प्रकार हैं: ‘सामान्य वर्ग’ (18 से 40 वर्ष) और ‘विशेष वर्ग’ (41 से 65 वर्ष)। 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को प्रवेश नहीं दिया जाता है।
  • विशेषता: 25 दिनों के वर्ग के दौरान स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में पथ संचलन करते हैं। समापन समारोह नागपुर शहर द्वारा आयोजित होता है, जिसमें सरसंघचालक जी का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त होता है।

वर्ष 2024 से लागू प्रशिक्षण का नया प्रारूप

संगठनात्मक आवश्यकताओं को देखते हुए 2024 से प्रशिक्षण की अवधि और नामों में निम्नलिखित परिवर्तन किए गए हैं:

वर्ग का नामअवधिपूर्व नाम
प्रारंभिक वर्ग3 दिन
प्राथमिक शिक्षा वर्ग7 दिन
संघ शिक्षा वर्ग15 दिनसंघ शिक्षा वर्ग (प्रथम वर्ष)
कार्यकर्ता विकास वर्ग-120 दिनसंघ शिक्षा वर्ग (द्वितीय वर्ष)
कार्यकर्ता विकास वर्ग-225 दिनसंघ शिक्षा वर्ग (तृतीय वर्ष)

नागपुर से देशव्यापी विस्तार

  • 1934: नागपुर के बाद पुणे में आयोजन शुरू हुआ।
  • 1938: महाराष्ट्र के बाहर, भाई परमानन्द जी के प्रयासों से लाहौर में वर्गों की शुरुआत हुई।
  • 1940: इस वर्ष तक उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक के सभी प्रांतों से स्वयंसेवक नागपुर आने लगे। कार्य विस्तार के बाद अन्य प्रांतों में प्रथम और द्वितीय वर्ष आयोजित होने लगे, जबकि तृतीय वर्ष के लिए नागपुर आना अनिवार्य किया गया।

निरंतर प्रवाह में आई बाधाएं

इतने लंबे इतिहास में कुछ मौकों पर इन वर्गों को स्थगित करना पड़ा:

  • 1948-1949: संघ पर प्रतिबंध के दौरान।
  • 1976-1977: आपातकाल (Emergency) के दौरान।
  • 1991: विशेष राष्ट्रीय परिस्थितियों (पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या और चुनाव) के कारण।
  • 1993: संघ पर प्रतिबंध के कारण।
  • 2020-2021: कोरोना महामारी (COVID-19) के कारण।

विगत वर्षों में शिक्षार्थियों की संख्या (एक नजर में)

वर्षकुल/प्रमुख शिक्षार्थी
2012प्रथम वर्ष: 10,623, द्वितीय: 2,581, तृतीय (नागपुर): 923
2015प्रथम वर्ष: 17,835, द्वितीय: 3,715, तृतीय (नागपुर): 875
2017प्रथम वर्ष: 15,716, द्वितीय: 3,796, तृतीय (नागपुर): 899
2022कुल 101 वर्गों में 21,906 शिक्षार्थी शामिल हुए। (मई और दिसंबर में दो बार तृतीय वर्ष का आयोजन)।
2024कार्यकर्ता विकास वर्ग-2 (नागपुर): 936 शिक्षार्थी
2025कार्यकर्ता विकास वर्ग-2 (नागपुर): 840 शिक्षार्थी
2026कार्यकर्ता विकास वर्ग-2 (नागपुर): 880 शिक्षार्थी

समापन समारोहों के विशिष्ट अतिथि (2012-2026)

संघ शिक्षा वर्गों के समापन समारोहों में समाज के विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट हस्तियां मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होती रही हैं:

  • 2012: अश्वनी कुमार (दैनिक पंजाब केसरी के संचालक)
  • 2014: श्री श्री रवि शंकर (संस्थापक, आर्ट ऑफ लिविंग)
  • 2015: डॉ. विरेन्द्र हेगडे (धर्माधिकारी, धर्मस्थल कर्नाटक)
  • 2018: डॉ. प्रणब मुखर्जी (भारत के पूर्व राष्ट्रपति)
  • 2022: दाजी उपाख्य कमलेश पटेल (अध्यक्ष, श्रीरामचंद्र मिशन)
  • 2024: श्री रामगिरी जी महाराज
  • 2025: श्री अरविन्द जी नेताम (पूर्व केन्द्रीय मंत्री)
  • 2026: कुमारमंगलम बिड़ला (पद्मभूषण सम्मानित उद्योगपति)

वर्गों की प्रमुख विशेषताएं

  1. सामाजिक समरसता और समानता: देशभर से आए शिक्षार्थी बिना किसी जातीय या रंग-रूप के भेदभाव के सामूहिक निवास और भोजन करते हैं।
  2. स्वावलंबन: स्वयंसेवक अपना काम खुद करते हैं, जिससे उनमें आत्मनिर्भरता पैदा होती है।
  3. राष्ट्रीय दृष्टि: देश की भौगोलिक रचनाओं और चुनौतियों का प्रत्यक्ष अनुभव और उनके समाधान का बोध।
  4. अनुशासन और अपनत्व: कड़े अनुशासन के साथ-साथ संगठन और समाज के प्रति आत्मीयता का भाव।

मार्गदर्शक विचार: सरसंघचालकों का दृष्टिकोण

डॉ. हेडगेवार जी (पत्रों के माध्यम से):

“इन वर्गों में अधिकाधिक सुयोग्य और चुने हुए स्वयंसेवक आएं, ऐसी व्यवस्था करें। धन के अभाव में कार्य न रुके, इसकी चिंता करें।” (1936)

श्री गुरुजी:

“शिक्षा वर्ग के सारे कार्यक्रम सोच-समझकर स्वीकार किए गए हैं। केवल मन को प्रसन्न करने वाले कार्यक्रमों का उपयोग नहीं होता। संघ समाज में एकता की भावना निर्माण कर उसे अपने पैरों पर खड़ा रहने की शिक्षा देता है।”

डॉ. मोहन भागवत (वर्तमान सरसंघचालक):

“यह सब प्रशिक्षण क्यों चल रहा है? इसलिए चल रहा है क्योंकि भारत माता की जय सारे विश्व में करानी है। हमें किसी को जीतना नहीं है, हमें सबको जोड़ना है। संघ का कार्य जीतने के लिए नहीं, जोड़ने के लिए चलता है।” (नागपुर, 2022)

ऐतिहासिक घटनाक्रम (क्रोनोलॉजी)

  • 1927: नागपुर में पहले प्रशिक्षण शिविर (3 सप्ताह) की शुरुआत।
  • 1935: नागपुर के बाहर पुणे में प्रथम अधिकारी शिक्षा वर्ग का आयोजन।
  • 1938: नागपुर के समापन समारोह में 525 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। 15 अगस्त को लाहौर में अधिकारी शिक्षा वर्ग की शुरुआत।
  • 1940: पंजाब से बालवीर जी का नागपुर आगमन। संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार का देहावसान।
  • 1942: पुणे में 1100 स्वयंसेवकों ने भाग लिया, अंग्रेजों के विरुद्ध ‘हल्ला बोल’ का आह्वान।
  • 1947: अखंड भारत का अंतिम वर्ग पंजाब (फगवाड़ा और संगरूर) में हुआ, जिसे देश की परिस्थितियों के कारण 12 अगस्त की जगह 6 अगस्त को पूर्ण करना पड़ा।
  • 1968, 1972, 1975, 1977: जयप्रकाश नारायण जी (जेपी) विभिन्न वर्षों में संघ के वर्गों में आए और स्वयंसेवकों की अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की प्रशंसा की।
  • 1973: बाला साहब देवरस सरसंघचालक के रूप में नागपुर वर्ग में पधारे।
  • 1981: नागपुर के समापन समारोह में रिपब्लिक पार्टी के अध्यक्ष आर.सी. गंवई शामिल हुए।
  • 2018: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नागपुर में तृतीय वर्ष के समापन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया।

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