उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर के मांडवा थाने में भ्रष्टाचार का एक ऐसा खेल चल रहा था जिसकी गूँज अब पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। एनडीपीएस (नशीले पदार्थ) के एक गंभीर मामले में ‘सौदा’ करने के आरोप में एसीबी ने मांडवा थानाधिकारी (SHO) और एक कांस्टेबल को लाखों की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया है। इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे के उन चेहरों को बेनकाब कर दिया है जो कानून की आड़ में अपराधियों को संरक्षण देने का काम कर रहे थे।
चार लोगों का नाम बचाने के लिए मांगे 20 लाख रुपये
पूरा मामला मांडवा थाने में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के एक पुराने मुकदमे से जुड़ा है। आरोप है कि थानाधिकारी निर्मल कुमार खत्री और कांस्टेबल भालाराम ने इस केस में चार व्यक्तियों को आरोपी नहीं बनाने और उनके खिलाफ कार्रवाई रोकने के बदले भारी भरकम रिश्वत की मांग की थी। थाना प्रभारी और कांस्टेबल ने मिलकर इस काम के लिए कुल 20 लाख रुपये का सौदा तय किया था। परिवादी पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उन चारों को जेल भेज दिया जाएगा।
8 लाख रुपये लेते ही एसीबी ने बिछाया जाल
परिवादी की शिकायत पर उदयपुर एसीबी की टीम ने डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में जाल बिछाया। रविवार को जैसे ही परिवादी रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 8 लाख रुपये लेकर पहुँचा, एसीबी की टीम ने दबिश दे दी। थानाधिकारी निर्मल कुमार खत्री और कांस्टेबल भालाराम को इस भारी-भरकम राशि के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया गया। एसीबी की इस अचानक हुई कार्रवाई से थाने में हड़कंप मच गया और पुलिसकर्मियों को भागने तक का मौका नहीं मिला।
भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी की बड़ी स्ट्राइक
एसीबी के अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस रिश्वत के खेल में पुलिस के और कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं। एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजीव जोशी और उनकी टीम ने किया। पुलिस महकमे में इस बड़ी गिरफ्तारी के बाद सन्नाटा पसरा हुआ है।
