सीकर। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि साहित्य समाज की संवेदनाओं, संस्कारों और सांस्कृतिक चेतना को अभिव्यक्ति देता है। साहित्यिक आयोजन केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये ज्ञान के विस्तार और नए चिंतन को भी प्रोत्साहित करते हैं। राज्यपाल शुक्रवार को सीकर के सालासर रोड स्थित गोविंदम रिसॉर्ट में तीन दिवसीय ‘शेखावाटी साहित्य संगम’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
श्री केशव संस्कृति प्रन्यास और पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा, राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत पर गंभीर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

शेखावाटी का गौरवशाली सैन्य और व्यापारिक इतिहास
राज्यपाल बागड़े ने शेखावाटी अंचल के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह क्षेत्र वीरता, त्याग, तपस्या और उद्यमशीलता की समृद्ध परंपराओं के लिए विख्यात है। राष्ट्ररक्षा के साथ-साथ शिक्षा और व्यापार के क्षेत्र में भी यहां के लोगों ने उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि शेखावाटी की गौरवशाली सैन्य परंपरा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां अनेक परिवारों की तीसरी और चौथी पीढ़ी आज भी देश की सशस्त्र सेनाओं में सेवाएं दे रही है। उन्होंने राजस्थानी लोकसाहित्य का जिक्र करते हुए कहा कि यहां की माताएं अपने बच्चों को पालने में ही मातृभूमि की रक्षा के संस्कार देती हैं।
भारतीय ज्ञान परंपरा और शिक्षा में नैतिकता पर बल
भारतीय दर्शन की विरासत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि रामायण, महाभारत और उपनिषद जैसे हमारे ग्रंथ आज भी विश्व भर में अध्ययन और चिंतन का विषय हैं। उन्होंने गणित और विज्ञान में भारतीय मनीषियों के योगदान, विशेषकर ‘शून्य’ की खोज और धार्मिक साहित्य के प्रचार-प्रसार में गीता प्रेस, गोरखपुर के योगदान का स्मरण किया। शिक्षा व्यवस्था पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में बौद्धिक क्षमता के साथ नैतिकता, विवेक, व्यावहारिक समझ और संस्कारों का विकास भी होना चाहिए। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में शिक्षा, साहित्य और सांस्कृतिक मूल्यों की अहम भूमिका होगी।
आंतरिक सुरक्षा के लिए शास्त्र जरूरी: डॉ. अविनाश सिंह
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. अविनाश सिंह पंवार (निदेशक, सेंटर फॉर इलेक्ट्रॉनिक गवर्नेंस, तकनीकी शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार) ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की बाहरी सीमाओं की सुरक्षा के लिए ‘शस्त्र’ आवश्यक हैं, लेकिन देश की आंतरिक सुरक्षा और वैचारिक चेतना को अक्षुण्ण रखने के लिए ‘शास्त्रों’ (साहित्य और ज्ञान) का विशेष महत्व है। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता शेखावाटी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. युद्धवीर सिंह ने की। इस अवसर पर सीकर की स्केच कलाकार अपूर्वा ने राज्यपाल को उनका हस्तनिर्मित रेखाचित्र भी भेंट किया।
वैचारिक सत्रों और प्रतियोगिताओं में दिखी संस्कृति की झलक महोत्सव के पहले दिन उद्घाटन के पश्चात ‘जनसंख्या परिवर्तन’, ‘कश्मीर’ और ‘वंदे मातरम्’ जैसे ज्वलंत विषयों पर वैचारिक सत्र आयोजित हुए। साथ ही राजस्थानी कला को बढ़ावा देने के लिए साफा-पगड़ी बांधने और मेहंदी प्रतियोगिताएं भी हुईं। साफा-पगड़ी प्रतियोगिता में लोकेन्द्र सिंह और मेहंदी प्रतियोगिता में अंजना ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
आयोजन मंडल के अनुसार, 10 अक्टूबर को तकनीक, जेन-जी (Gen-Z) और हल्दीघाटी के ऐतिहासिक संदर्भों पर चर्चा होगी। वहीं, 11 अक्टूबर को संत रविदास के विचार, नेतृत्व के आयाम और चित्रकला व लोकनृत्य प्रतियोगिताओं के साथ इस भव्य साहित्य संगम का समापन होगा। कार्यक्रम स्थल पर आयोजित पुस्तक मेले में भी पाठकों और विद्यार्थियों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां देश के प्रतिष्ठित प्रकाशनों की पुस्तकें उपलब्ध हैं।
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