जयपुर। भारतीय ज्ञान परंपरा, लोक संस्कृति और राष्ट्रीय चिंतन के मंच ‘लोकमंथन 2026’ का जयपुर में औपचारिक शंखनाद हो गया है। बुधवार को जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लोकमंथन 2026 की स्वागत समिति और आयोजन समिति की घोषणा करते हुए इसका विधिवत शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने आयोजन की आधिकारिक वेबसाइट का भी लोकार्पण किया। इस वर्ष यह राष्ट्रीय आयोजन 4 से 6 दिसंबर तक जयपुर में “हम भारत के लोग” विषय पर आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य राष्ट्र की वैचारिक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करना है।
संवाद से ही सशक्त होगा भविष्य का भारत

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार ने संवाद की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि भारत का निर्माण सार्थक संवाद से हुआ है और भविष्य का भारत भी निरंतर, रचनात्मक, स्वस्थ और बहुआयामी संवाद से ही सशक्त होगा। यह केवल अधिकार नहीं, बल्कि कर्तव्य का विषय है। प्राचीन संवाद परंपरा को आधुनिक काल में पुनः स्थापित करने के लिए लोकमंथन की शुरुआत की गई थी, जिसका पहला कार्यक्रम ‘उपनिवेशवाद से भारतीय मानस की मुक्ति’ पर केंद्रित था।
नंदकुमार ने स्पष्ट किया कि संवाद केवल शहरों या प्रबुद्ध वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांव, देहात, वनांचल और जनजातीय क्षेत्रों के हर वर्ग को इसमें शामिल करना होगा। भारत का संवाद समग्र समाज का संवाद होना चाहिए, जिसमें अंतिम पंक्ति के व्यक्ति की भागीदारी हो। भारतीय चिंतन में संवाद का उद्देश्य किसी को पराजित करना नहीं, बल्कि स्वयं ज्ञान प्राप्त करना और दूसरों को ज्ञान देना है (विवाद या विजय नहीं, तत्वज्ञान)। उन्होंने सार्थक संवाद के चार मूल तत्व- स्वस्थता, रचनात्मकता, निरंतरता और बहुआयामिता बताए। नंदकुमार ने पश्चिमी सीमित डायलॉग की तुलना में भारतीय संवाद को समग्र समाज और प्रकृति से जुड़ा बताया और स्पष्ट किया कि टीवी चैनलों की सार्वजनिक बहसें भारतीय संवाद परंपरा का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। भारत का निर्माण केवल नगरों के शिक्षित वर्ग से नहीं, बल्कि वनवासी, ग्रामवासी और नागरिकों के साझा संवाद से समृद्ध हुआ है।
राजस्थान भक्ति और शक्ति की धरती

समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पांचवें संस्करण के लिए राजस्थान के चयन को गौरव की बात बताया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप और मीराबाई की यह धरती हमेशा ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ के भाव से प्रेरित रही है। भारत में हर कार्य गांव की चौपाल से शुरू होता है। राजस्थान में रामलीला और रासलीला का मंचन भी एक प्रकार का लोकमंथन ही था, जो व्यक्ति के मन में आदर्श भाव पैदा करता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र प्रथम के भाव को सशक्त कर सांस्कृतिक पुनरुत्थान को बल दिया है। उन्होंने परंपरा और विरासत को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे मंचों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हमें विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा।
हम लोग ही लोक हैं, फोक नहीं
केंद्रीय पर्यटन व संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने संबोधन में कहा कि लोकमंथन का मुख्य आयोजन दिसंबर के पहले सप्ताह में होगा। मुख्यमंत्री के यमुना जल समझौते के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम एक विचार के शंखनाद का उत्सव है। भारतीय संस्कृति ने कभी औपनिवेशिक मानसिकता को स्वीकार नहीं किया और यह आयोजन लोगों को हीनता की भावना से मुक्ति दिलाता है। ‘हम भारत के लोग’ देश के 140 करोड़ लोगों का सामूहिक सांस्कृतिक उद्घोष है, जिसका स्पष्ट अर्थ है कि ‘हम लोग ही लोक हैं, फोक नहीं’। शेखावत ने कहा कि मशीन लर्निंग के युग में भी भारत के पास पूर्वजों की प्राकृत प्रज्ञा मौजूद है और दमन के चरम काल में भी लोक कलाएं जीवित रहीं। लोकमंथन लोक और शास्त्र के मनभेद को मिटाने का बड़ा अवसर है। यह आयोजन राजस्थान को भारत के सांस्कृतिक विमर्श का प्रमुख केंद्र बनाएगा।
भगीरथ बने मुख्यमंत्री, दिखी लोक संस्कृति की झलक
उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ‘राजस्थान का भगीरथ’ बताते हुए जे. नंदकुमार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोकमंथन का आयोजन समाज को नई दिशा और विचार देने का सशक्त माध्यम है। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने के लिए विद्यालय, परिवार और समाज सभी की भागीदारी आवश्यक है, क्योंकि हमारा विज्ञान, योग परंपरा और वसुधैव कुटुंबकम ही हमारी असली पहचान है।
समारोह में पद्मश्री तगाराम भील भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस दौरान लोक कलाकारों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम को राजस्थान की लोक संस्कृति से जीवंत कर दिया। अंत में प्रज्ञा प्रवाह जयपुर प्रांत के संयोजक देवेश बंसल ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

