रामगंजमंडी। विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट भीलवाड़ा की अदालत ने करीब 12 साल पुराने चेक बाउंस प्रकरण में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी युवक को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। परिवादी अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। मामला वर्ष 2012 का है परिवादी सुधीर गर्ग ने अपनी फर्म रोहित स्टोन कंपनी रामगंजमंडी के माध्यम से कोटा स्टोन खरीद-फरोख्त के एवज में आरोपी को 12 लाख 59 हजार रुपये का चेक लगाया था। चेक बाउंस होने पर उन्होंने विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रकरण संख्या 4 में मुकदमा दायर किया। अदालत में सुनवाई के दौरान परिवादी अपने द्वारा दी गई राशि और लेन-देन को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। वहीं बचाव पक्ष की ओर से अभियुक्त ने अदालत को बताया कि उसकी फर्म का सीए कार्य नितिन महेश्वरी करते थे। उसी दौरान उन्होंने मौके का फायदा उठाकर उक्त चेक परिवादी,जो उनके जीजा को सौंप दिया था। अभियुक्त के अनुसार परिवादी ने स्वयं की फर्म में टैक्स से बचने के उद्देश्य से इस चेक का प्रयोग किया। बचाव पक्ष ने इस संबंध में न्यायालय के समक्ष आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए। गवाही और दस्तावेजों के आधार पर यह साबित हुआ कि परिवादी चेक की राशि को अपने वास्तविक लेन-देन का हिस्सा सिद्ध नहीं कर पाया। इस पर न्यायालय ने माना कि परिवादी ने कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया है। ऐसे में अभियुक्त को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया।
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