कोटा | राजस्थान के शैक्षणिक हब कोटा शहर में विकास कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण एक रिटायर्ड प्रिंसिपल की दर्दनाक मौत के मामले में कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। केडीए प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बड़ी दंडात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसके तहत विभाग के तीन जिम्मेदार इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही संबंधित निर्माण कार्य कर रही ठेकेदार फर्म पर 17.23 लाख रुपए की भारी पेनल्टी लगाते हुए उसे आगामी छह महीने के लिए ब्लैकलिस्ट (काली सूची) में डाल दिया गया है। विकास प्राधिकरण के इस त्वरित और कड़े एक्शन से शहर के अन्य निर्माण विभागों और ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है।
केडीए सचिव मुकेश चौधरी ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि बोरखेड़ा क्षेत्र में हुए इस दर्दनाक हादसे के तुरंत बाद 22 मई को एक उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन कर पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कराई गई थी। जांच टीम की शुरुआती रिपोर्ट में यह साफ तौर पर सामने आया है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम न होना ही इस हादसे का मुख्य कारण था और अधिकारियों व ठेकेदार के स्तर पर घोर लापरवाही बरती गई थी।
इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर केडीए ने कार्रवाई करते हुए एग्जिक्यूटिव इंजीनियर सागर मीणा, असिस्टेंट इंजीनियर लालचंद मटोरिया और जूनियर इंजीनियर विनोद मण्डावत को सस्पेंड कर उनके खिलाफ सख्त विभागीय जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा, कार्यादेश (Work Order) की शर्तों और सुरक्षा नियमों का सरेआम उल्लंघन करने पर ठेकेदार फर्म ‘मेसर्स इंजीनियर नरेन्द्र कुमार गुप्ता’ को छह महीने के लिए प्रतिबंधित करते हुए उस पर 17,23,712 रुपए का आर्थिक जुर्माना भी ठोक दिया गया है।
गौरतलब है कि कोटा के बोरखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली गोकुल कॉलोनी में स्थित एक बड़े और गहरे खुले नाले में बाइक सहित गिर जाने के कारण 60 वर्षीय रिटायर्ड प्रिंसिपल रामेश्वर रावत की असमय मौत हो गई थी। बीते 21 मई की सुबह करीब 10 बजे स्थानीय लोगों को उनकी लाश नाले के भीतर पानी में बाइक के नीचे दबी हुई मिली थी, जिसके बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने शव को नाले से बाहर निकलवाकर एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी भिजवाया, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया था।
इस दर्दनाक हादसे के बाद से ही स्थानीय निवासियों और परिजनों में नगर विकास के नाम पर बरती जा रही इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त था। लोगों का आरोप है कि यह नाला लंबे समय से बिना किसी बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड के पूरी तरह खुला पड़ा था। इस हादसे के बाद अब केडीए ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शहर में चल रहे सभी विकास कार्यों में सुरक्षा संबंधी मानकों की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित करने और अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।