कोटा: शिक्षा नगरी कोटा (Kota) में साहित्य और राष्ट्रभक्ति के अनूठे संगम का गवाह बना अखिल भारतीय साहित्य परिषद् का 9वां प्रदेश महाधिवेशन (9th State Convention) संपन्न हो चुका है। तलवंडी स्थित राजकीय आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा एकीकृत महाविद्यालय में आयोजित इस महाधिवेशन का मुख्य उद्देश्य ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ तक की यात्रा और भारतीय साहित्य को नए आयाम देना था। कार्यक्रम की शुरुआत परिषद् गान और मां भारती व मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई थी।

‘भारत की आत्मा साहित्यकारों में बसती है’
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ओम कृष्ण बिरला ने साहित्यकारों की महत्ता पर जोर देते हुए कहा था कि “भारत की आत्मा भारत के साहित्यकारों में बसती है।” उन्होंने एक रचनाकार के पावन दायित्व और समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी का गहराई से उल्लेख किया। बिरला ने कहा कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद् (Akhil Bharatiya Sahitya Parishad) की स्थापना का मूल उद्देश्य हमेशा से ‘भारतबोध’ और ‘राष्ट्रभक्ति’ से युक्त भारतीयता रहा है। आज यह संस्था ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ जैसे उदात्त वैश्विक मानवीयता के मापदंडों पर पूरी तरह से खरी उतर रही है। इस सत्र का कुशल संचालन परिषद् के प्रदेश महामंत्री डॉ. केशव शर्मा ने किया।
कालिदास और तुलसीदास के विराट मूल्यों की गूंज (Values in Indian Literature)
इस महाधिवेशन में विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए डॉ. पवनपुत्र बादल ने भारतीय साहित्य (Indian Literature) के मानवीय मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत भूमि हमेशा से महान साहित्यकारों और विचारकों की जननी रही है। अपने संबोधन में उन्होंने महाकवि कालिदास और गोस्वामी तुलसीदास के काव्य में रचे-बसे विराट मानवीय और सांस्कृतिक मूल्यों का जिक्र कर उपस्थित साहित्यकारों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लोक साहित्य, युवा और बाल विषयों पर हुआ गहन मंथन (Focus on Youth & Folk Literature)
आयोजन के दौरान तृतीय सत्र मुख्य रूप से ‘लोक मंथन की जानकारी, बाल साहित्य, युवा कार्य और लोक साहित्य’ (Folk Literature) पर केंद्रित रहा। इस सत्र में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के राष्ट्रीय मंत्री भरत ठाकौर, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. इंदु शेखर तत्पुरुष और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अन्नाराम शर्मा ने अपने विचार साझा किए। इस ज्ञानवर्धक सत्र का संचालन जयपुर प्रांत के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश भार्गव द्वारा किया गया।
पुस्तकों का लोकार्पण और नई जिम्मेदारियों का ऐलान (Book Launch & Announcements)
महाधिवेशन के चतुर्थ सत्र में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए ‘आदर्श इकाई एवं वार्षिक कैलेंडर’ पर विस्तार से चर्चा की गई। इस सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में भरत ठाकौर, डॉ. अन्नाराम शर्मा और पवनपुत्र बादल मौजूद रहे। इसी सत्र के दौरान साहित्य परिषद् से जुड़े साहित्यकारों की नई पुस्तकों का लोकार्पण (Book Launch) भी किया गया। इसके बाद पंचम सत्र में संभाग स्तर की बैठकें हुईं, जहां ‘दायित्व घोषणा और दायित्व बोध’ पर चर्चा करते हुए संगठन से जुड़ी कई अहम जिम्मेदारियों का ऐलान किया गया।
काव्य संध्या: जब कविताओं से जागी राष्ट्रभक्ति (Nationalism in Poetry Session)
दिनभर चले वैचारिक मंथन के बाद, संध्याकाल में ‘संघ विषय पर केंद्रित काव्य’ का भव्य आयोजन हुआ। इस काव्य संध्या (Poetry Session) में प्रदेश भर से आए हुए कवियों ने अपनी ओजस्वी कविताओं का पाठ कर समां बांध दिया। कवि योगीराज योगी के कुशल संचालन में सजी इस महफिल ने महाधिवेशन के उत्तरार्द्ध को पूरी तरह से राष्ट्रीयता (Nationalism) और देशभक्ति (Patriotism) के रंगों से सराबोर कर दिया।