राजस्थान में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक और सनसनीखेज प्रमाण बाड़मेर के बायतू इलाके से सामने आया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर जल’ पहुंचाने के दावे वाली ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) योजना में अधिकारियों और ठेकेदारों की नापाक मिलीभगत ने सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा दिया है। यह घोटाला न केवल वित्तीय है, बल्कि 180 गांवों की जनता की सेहत और भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।
188 करोड़ का टेंडर: नियमों को ठेंगे पर रखा जानकारी के अनुसार, बायतू, गिड़ा और बालोतरा के 180 गांवों को मीठा पानी पहुंचाने के लिए साल 2021-22 में 188.44 करोड़ रुपये का भारी-भरकम टेंडर जारी किया गया था। यह काम ‘मेसर्स एसबीआई एंटरप्राइजिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. जोधपुर’ नाम की कंपनी को सौंपा गया। टेंडर की शर्तों के अनुसार, सामग्री उच्च गुणवत्ता वाली और अनिवार्य रूप से ISI मार्क की होनी चाहिए थी। लेकिन ज़मीनी हकीकत में ठेकेदार ने मुनाफे के लिए हर नियम को ताक पर रख दिया।
विभागीय जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे मामले की गंभीरता को देखते हुए की गई विभागीय जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी बड़े संगठित घोटाले की ओर इशारा करते हैं:
- बिना ISI मार्क का सामान: ठेकेदार ने टेंडर की मूल शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए बिना ISI मार्क वाले और अत्यंत घटिया क्वालिटी के फिटिंग सामान (HDP पाइप, जॉइंट, टी, बेंड आदि) का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया।
- टेक्निकल फ्रॉड और पुरानी पद्धति: कंपनी को जिस एडवांस्ड तकनीक (HHDD) से काम करना था, उसके बजाय बजट बचाने और अनैतिक लाभ कमाने के लिए पुरानी और सस्ती पद्धति का उपयोग किया गया।
- पाइपलाइन बिछाने में धांधली: जहां नियमों के अनुसार पाइपलाइन को तय गहराई में बिछाया जाना था, वहां उसे सतह के बेहद करीब छोड़ दिया गया है। इससे भविष्य में पाइपलाइन के जल्द टूटने और आपूर्ति ठप होने का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
- फर्जी और अतिरिक्त भुगतान: रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 4-5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान विभाग को हुआ है, क्योंकि ठेकेदार ने घटिया सामान लगाकर ऊंची दरों पर भुगतान उठा लिया।
इंजीनियरों की चुप्पी और ‘मौन सहमति’ इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल जलदाय विभाग (PHED) के उन आला अधिकारियों और फील्ड इंजीनियर्स पर उठता है, जिनकी जिम्मेदारी काम की गुणवत्ता की निगरानी करना था। जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि बिना विभागीय सक्षम स्वीकृति के सामान बदला गया। तकनीकी रूप से यह स्पष्ट है कि उच्चाधिकारियों और मौके पर मौजूद इंजीनियरों की ‘मौन सहमति’ या मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी लूट संभव नहीं थी।
सीधे सवाल: जनता के पैसे की इस खुली लूट पर ‘Expose Now’ सरकार और प्रशासन से कुछ तीखे सवाल पूछता है: क्या केवल पेनल्टी लगा देने या ठेकेदार से कुछ रिकवरी कर लेने भर से जनता की गाढ़ी कमाई की भरपाई हो जाएगी? 188 करोड़ के इस बड़े प्रोजेक्ट में हुए इस सुव्यवस्थित भ्रष्टाचार के असली ‘खिलाड़ी’ कौन हैं? क्या भजनलाल सरकार इन भ्रष्ट अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की कड़ी कार्रवाई करेगी या यह मामला भी पिछली सरकारों की तरह फाइलों में ही दबा दिया जाएगा?
