कागजी कार्रवाई नहीं, अब चाहिए एक्शन: जोजरी नदी मामले में SC की DGP को फटकार, ‘क्या आप हमारी बात सुन रहे हैं?’

Madhu Manjhi

जयपुर। राजस्थान की जोजरी नदी में बढ़ते प्रदूषण और उसकी बदहाली का मामला अब बेहद गंभीर हो गया है। देश की सबसे बड़ी अदालत (Supreme Court) ने इस मामले में राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर भारी सख्ती दिखाई है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब सिर्फ कागजी कार्रवाई और आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। अदालत ने राजस्थान पुलिस के महानिदेशक (DGP) को सीधे निर्देश देते हुए कहा है कि इस मामले में तुरंत FIR दर्ज की जाए और मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए।

अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ इस गंभीर मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत का रुख बेहद सख्त नजर आया।

कोर्ट ने साफ कहा कि इस पूरे मामले में ऊपर से लेकर नीचे तक उन सभी अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए, जिनके कार्यकाल में नदी की यह दुर्दशा हुई है। पीठ ने कहा, “यह जांच सिर्फ औपचारिक नहीं होनी चाहिए। नदी में प्रदूषण फैलने के पीछे किन अधिकारियों या जिम्मेदार लोगों की भूमिका रही है, उनकी जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।”

DGP से कोर्ट ने पूछा- “क्या आप हमारी बात सुन रहे हैं?”

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजस्थान पुलिस के मुखिया (DGP) को लेकर भी सख्त टिप्पणी की। अदालत ने पूछा, ‘क्या आप हमारी बात सुन रहे हैं?’ इस पर अदालत में मौजूद डीजी (ट्रेनिंग) अनिल पालीवाल ने जानकारी दी कि DGP वेब रूम (वर्चुअल माध्यम) के जरिए सुनवाई से जुड़े हुए हैं। इसके बाद कोर्ट ने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच सीधे DGP की निगरानी में होनी चाहिए और पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट (Action Taken Report) जल्द से जल्द अदालत के सामने पेश की जाए।

SIT और FIR से गहराई से होगी जांच

अदालत द्वारा FIR दर्ज करने और SIT गठित करने के निर्देश से यह साफ हो गया है कि अब इस मामले को केवल ‘प्रशासनिक लापरवाही’ मानकर नहीं छोड़ा जाएगा। कोर्ट यह जानना चाहता है कि प्रदूषण रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने अपना काम क्यों नहीं किया और इसके पीछे किसकी मिलीभगत है।

लापरवाही पर अवमानना (Contempt) की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही बरती गई या अदालत के आदेशों की अनदेखी हुई, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सीधे अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अदालत की इस सख्त टिप्पणी के बाद राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

लंबे समय से उठ रही थी मांग: गौरतलब है कि जोजरी नदी में औद्योगिक कचरे और सीवरेज के कारण हो रहे प्रदूषण का मामला लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय नागरिक और पर्यावरण प्रेमी लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के सीधे दखल और सख्ती के बाद उम्मीद जगी है कि आने वाले दिनों में प्रदूषण फैलाने वालों और लापरवाह अधिकारियों पर बड़ी और निर्णायक कार्रवाई देखने को मिलेगी।

Live Sach – तेज़, भरोसेमंद हिंदी समाचार। राजनीति, राजस्थान से ब्रेकिंग न्यूज़, मनोरंजन, खेल और भारत की हर बड़ी खबर!

Share This Article