सीकर, 10 अक्टूबर। शेखावाटी साहित्य संगम के दूसरे दिन इतिहास की गौरवगाथा, तकनीक की चुनौतियों और लोकसंस्कृति के संरक्षण पर गंभीर विमर्श हुआ। शनिवार को सालासर रोड स्थित गोविंदम रिसॉर्ट में आयोजित विभिन्न सत्रों में गुरु तेग बहादुर के बलिदान, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, हवेलियों के भित्तिचित्रों और रील (Reel) बनाम रियल लाइफ (Real Life) जैसे प्रासंगिक विषयों पर चर्चा की गई। वहीं, लोककला प्रतियोगिताओं और नाटकों में राजस्थानी संस्कृति और समरसता के विविध रंग दिखाई दिए। यह आयोजन श्री केशव संस्कृति प्रन्यास और पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
युवाओं की भूमिका और तकनीक का बढ़ता प्रभाव
प्रथम सत्र ‘Gen Z, टेक्नोलॉजी और एल्गोरिद्म : विकसित भारत में भूमिका’ में विकसित भारत 2047 के संदर्भ में युवा शक्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सोशल मीडिया के प्रभाव पर चर्चा हुई। मुख्य वक्ता कर्ण कटारिया ने बताया कि डिजिटल माध्यमों का सही उपयोग युवाओं को कैसे सशक्त बना सकता है। सत्र का संचालन अनिल सैनी ने किया।
शेखावाटी की हवेलियां: लोकजीवन और इतिहास की कहानी
‘लोकमंथन एवं लोकवास्तु’ सत्र में शेखावाटी की अनमोल हवेलियों और भित्तिचित्रों (फ्रेस्को चित्रकला) के संरक्षण पर मंथन हुआ। सुरेश कुमार नायक और सोनिया शर्मा ने मंडावा, नवलगढ़, फतेहपुर, झुंझुनूं और चूरू की हवेलियों का उदाहरण देते हुए कहा कि हर हवेली की अपनी एक कहानी है, जो उसकी चित्रकला और स्थापत्य से समझी जा सकती है। अतुल सैनी ने चूने और पत्थर से बनी इन हवेलियों में दर्ज देवी-देवताओं और लोककथाओं (जैसे राजा मोरध्वज) के प्रसंगों का जिक्र किया। विशेषज्ञों ने नई पीढ़ी को इस विरासत से जोड़ने के लिए शैक्षणिक भ्रमण और कार्यशालाएं आयोजित करने पर जोर दिया।
इतिहास से हौसला: युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते
‘हल्दीघाटी से वैश्विक चुनौती तक : आज का भारत’ सत्र में महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदन सिंह राठौड़ ने कहा कि इतिहास हमें विपरीत परिस्थितियों में साहस बनाए रखने की प्रेरणा देता है। हल्दीघाटी के संघर्ष का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “युद्ध केवल हथियारों से नहीं, हौसलों से भी लड़े जाते हैं।” उन्होंने नेतृत्व क्षमता और संकट प्रबंधन (Crisis Management) के महत्व को रेखांकित किया।
सिनेमा और रील लाइफ: सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं
‘रील, रियलिटी और सिनेमा’ विषय पर बोलते हुए जाने-माने अभिनेता राहुल सिंह ने कहा कि सिनेमा युवाओं की सोच को बहुत प्रभावित करता है, लेकिन वास्तविक जीवन में सफलता का कोई ‘शॉर्टकट’ नहीं होता। सफलता के लिए कड़ी मेहनत और पढ़ाई जरूरी है। फिल्म लेखक सूर्यपाल ने भी युवाओं को आभासी दुनिया (Virtual World) के आकर्षण से निकलकर वास्तविक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
गुरु तेग बहादुर का बलिदान और जनसांख्यिकीय परिवर्तन
अन्य महत्त्वपूर्ण सत्रों में, ‘हिंद की चादर : गुरु तेग बहादुर जी’ विषय पर गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह ने गुरु तेग बहादुर के बलिदान और उनकी शिक्षाओं की वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। वहीं, एक अन्य वैचारिक सत्र में मुख्य वक्ता कमलेश ने ‘भारत में जनसांख्यिकीय परिवर्तन’ (Demographic Changes) के गंभीर विषय पर अपनी बात रखी।
लोककला के रंग: नाटकों में गूंजा समरसता और स्वाभिमान का संदेश

संगम के सांस्कृतिक मंच पर 200 से अधिक प्रतिभागियों ने एकल लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिताओं में राजस्थानी संस्कृति की सजीव झलक पेश की। रात्रिकालीन सत्र में जयपुर के युवतरंग संस्कृत नाट्य दल ने दो शानदार नाटक प्रस्तुत किए:
संत शिरोमणि गुरु रविदास: दीपक भारद्वाज द्वारा निर्देशित इस नाटक में ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ कथा के माध्यम से श्रम की गरिमा और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।
वीरांगना हीरा दे: जालौर की इस लोकप्रचलित शौर्यगाथा के माध्यम से कर्तव्य, साहस और स्वाभिमान को मंच पर जीवंत किया गया।
परिसर में आयोजित पुस्तक मेले में भी साहित्य और इतिहास की पुस्तकों को लेकर पाठकों और विद्यार्थियों में भारी उत्साह देखा गया।
रविवार (11 अक्टूबर) के विशेष सत्रआयोजन के अंतिम दिन रविवार को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ का विशेष व्याख्यान होगा। इसके अलावा, स्प्रिंग बोर्ड के प्रसिद्ध इतिहास वक्ता राजवीर सिंह चलकोई ऐतिहासिक वीरों और राजस्थान की वीर परंपरा से जुड़े प्रसंगों पर एक विशेष सत्र को संबोधित करेंगे।
Shekhawati Sahitya Sangam, Sikar News, Gen Z and Technology, Shekhawati Havelis, Guru Tegh Bahadur, Haldighati History, Rajasthan Culture, Rajveer Singh Chalkoi, Rahul Singh Actor, Literature Festival.