फ्लैट खरीदारों को बड़ी राहत: RERA के भारी ब्याज से बचने का ‘बिल्डर गेम’ फेल, हाईकोर्ट ने जेडीए को किया पाबंद

जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजधानी जयपुर के रीयल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने और फ्लैट खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होने वाला फैसला सुनाया है। न्यायाधीश गणेश राम मीणा की एकलपीठ ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को स्पष्ट रूप से पाबंद किया है कि किसी भी आवासीय प्रोजेक्ट का ‘पूर्णता प्रमाण पत्र’ (Completion Certificate) तब तक जारी न किया जाए, जब तक कि उसका भौतिक सत्यापन (Physical Verification) न कर लिया जाए।

बिल्डर-जेडीए-आर्किटेक्ट की ‘ट्रिनिटी’ पर आरोप

यह मामला वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश कुमार साहनी की याचिका पर सामने आया है। याचिकाकर्ता ने सिद्धार्थ नगर स्थित ‘जयपुर मोटल्स एंड बिल्ड स्टेट्स’ के एक प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया था। आरोप है कि प्रोजेक्ट अभी अधूरा है, लेकिन बिल्डर ने जेडीए और अधिकृत आर्किटेक्ट के साथ मिलीभगत कर इसे कागजों में ‘पूरा’ दिखाकर सर्टिफिकेट हासिल करने की कोशिश की।

क्यों होता है ‘पूर्णता प्रमाण पत्र’ का खेल?

अदालत में सुनवाई के दौरान रीयल एस्टेट के एक बड़े ‘स्कैम’ की पोल खुली:

  • RERA का डर: रेरा नियमों के अनुसार, यदि प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं होता, तो बिल्डर को खरीदारों को भारी ब्याज और पेनल्टी देनी पड़ती है।
  • पेनल्टी से बचने की जुगत: इस आर्थिक नुकसान से बचने के लिए बिल्डर अधूरे प्रोजेक्ट का ही सर्टिफिकेट ले लेते हैं, ताकि कागजों में काम ‘पूरा’ दिखे।
  • खरीदार की परेशानी: सर्टिफिकेट मिलने के बाद बिल्डर खरीदार पर पजेशन लेने का दबाव बनाता है, जबकि मौके पर फ्लैट रहने लायक स्थिति में भी नहीं होता।

अदालत का फैसला और अगली कार्रवाई

हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जेडीए को निर्देश दिए हैं कि जब तक मौके की सत्यापन रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक कोई प्रमाण पत्र जारी न हो। मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी। इस फैसले से उन हजारों खरीदारों को राहत मिली है जो अपनी जीवनभर की कमाई फ्लैट में लगाकर बिल्डरों के चक्कर काट रहे हैं।

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