राजस्थान में औद्योगिक कचरे और जल संकट का स्थाई इलाज: हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर स्थापित होंगे ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ प्लांट

Madhu Manjhi

जयपुर। राजस्थान की औद्योगिक इकाइयों को आर्थिक संबल प्रदान करने और राज्य में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भजनलाल शर्मा सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण योजना लागू की है। इस नई नीति के तहत प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) यानी सामूहिक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र की स्थापना के लिए 150 करोड़ रुपये तक का भारी अनुदान देने का ऐतिहासिक फैसला किया गया है।

अब रीको (RIICO) एवं नॉन-रीको दोनों ही प्रकार के औद्योगिक क्षेत्रों में ‘हाइब्रिड एन्युटी मॉडल’ पर आधुनिक तकनीक वाले ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ (Zero Liquid Discharge – ZLD) प्लांट स्थापित किए जाएंगे। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत गाइडलाइन भी जारी कर दी है।

क्यों पड़ी इस नई योजना की जरूरत?

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) शिखर अग्रवाल ने योजना के तकनीकी और व्यावहारिक पक्षों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार के इस कदम से प्रदेश के कपड़ा, केमिकल और अन्य विनिर्माण उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी।

वर्तमान में प्रदेश की ज्यादातर औद्योगिक इकाइयों में अपशिष्ट (केमिकल युक्त) जल का प्रबंधन व्यक्तिगत एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) या पुराने ढर्रे के क्लस्टर-स्तर के सीईटीपी के माध्यम से किया जाता है। अधिकांश पुराने प्लांट्स में रीसाइक्लिंग (Recycling) प्रणाली की भारी कमी है, जिससे दूषित पानी का पुन: उपयोग सीमित हो जाता है और भूजल प्रदूषित होता है। लेकिन इस नई योजना के तहत ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ तकनीक वाले प्लांट लगने से फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी को 100% शुद्ध कर दोबारा काम में लिया जा सकेगा, जिससे ताजे पानी की खपत न के बराबर रह जाएगी।

हाइब्रिड एन्युटी मॉडल: 80% खर्च उठाएगी सरकार

इस योजना के तहत प्लांट के निर्माण से लेकर उसके आगामी 20 वर्षों तक सुचारू संचालन के लिए एक पारदर्शी ढांचा तैयार किया गया है:

  • एसपीवी का गठन: औद्योगिक क्लस्टर की विभिन्न इकाइयों को मिलकर एक ‘स्पेशल पर्पज व्हीकल’ (SPV) यानी एक विशेष समिति का गठन करना होगा।
  • लागत का वर्गीकरण: राज्य सरकार द्वारा कुल परियोजना लागत का 80 प्रतिशत या अधिकतम 150 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। बची हुई मात्र 20 प्रतिशत राशि ही एसपीवी (उद्योगों) को वहन करनी होगी।
  • किस्तों में भुगतान (लंबे समय तक संचालन का फॉर्मूला): सीईटीपी के प्रभावी संचालन के लिए ‘हाइब्रिड एन्युटी मॉडल’ अपनाया गया है, जिसके तहत कार्य के चरणों के अनुसार भुगतान होगा।
    • 60 प्रतिशत अनुदान निर्माण के दौरान 20-20 प्रतिशत की तीन किस्तों में मिलेगा।
    • शेष 20 प्रतिशत राशि अगले 20 वर्षों के दौरान किस्तों में उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि प्लांट का लंबे समय तक रखरखाव और प्रभावी संचालन हो सके।

रीको और नॉन-रीको दोनों को फायदा: रीको औद्योगिक क्षेत्रों में यह वित्तीय सहायता रीको (RIICO) एवं राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) द्वारा संयुक्त रूप से दी जाएगी। वहीं, जो औद्योगिक क्षेत्र रीको से बाहर (नॉन-रीको) विकसित हैं, वहां राजस्थान सरकार और प्रदूषण नियंत्रण मंडल मिलकर यह वित्तीय मदद मुहैया कराएंगे।

एकमुश्त अनुदान की सीमा भी बढ़ाकर ₹100 करोड़ की गई

अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल ने बताया कि विभाग द्वारा सीईटीपी स्थापना से जुड़ी एक और योजना पहले से संचालित है, जिसके तहत किस्तों के बजाय एक बार में ही (एकमुश्त) अनुदान देने का प्रावधान है। राज्य सरकार ने उद्योगों को राहत देते हुए इस पुरानी योजना में भी बड़ा संशोधन किया है। अब इसके तहत दिए जाने वाले अधिकतम अनुदान को परियोजना लागत के 75 प्रतिशत या अधिकतम 75 करोड़ रुपये से बढ़ाकर सीधे 100 करोड़ रुपये कर दिया गया है। साथ ही, अब इस योजना का दायरा बढ़ाकर नॉन-रीको औद्योगिक क्षेत्रों को भी इसमें शामिल कर लिया गया है।

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