शिक्षा या व्यापार? जयपुर के 40 बड़े स्कूलों ने 25 हजार तक बढ़ाई फीस, 1.5 लाख परिवारों का बिगड़ा बजट

राजधानी जयपुर में 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से पहले ही अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। हर साल की तरह इस बार भी शहर के निजी स्कूलों ने अपनी मनमानी करते हुए 10 से 20 फीसदी तक फीस बढ़ा दी है। इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी ने मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है। फीस के साथ ही किताबों, यूनिफॉर्म और एडमिशन फीस में हुए भारी इजाफे ने अप्रैल महीने को अभिभावकों के लिए एक ‘आर्थिक संकट’ में तब्दील कर दिया है।

1.5 लाख परिवार प्रभावित, 25 हजार तक बढ़ी फीस

जानकारी के अनुसार, जयपुर शहर के 40 से अधिक बड़े निजी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब डेढ़ लाख विद्यार्थियों के परिवार इस बढ़ोतरी का दंश झेल रहे हैं। कई नामी स्कूलों में सालाना फीस 20,000 से 25,000 रुपए तक बढ़ गई है।

घर-घर की कहानी: वैशाली नगर निवासी एक अभिभावक ने बताया कि उनके दो बेटे अजमेर रोड स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ते हैं। स्कूल ने 12 फीसदी तक फीस बढ़ा दी है। ऐसे में एक बच्चे की फीस करीब 8 हजार रुपए तक बढ़ी है, जिससे उस परिवार पर कुल 16 हजार रुपए का अतिरिक्त आर्थिक भार आ पड़ा है।

कागजों में सिमटा ‘फीस एक्ट 2017’, कमेटियां मौन

राजस्थान में निजी स्कूलों की फीस नियंत्रित करने के लिए ‘राजस्थान स्कूल फीस एक्ट 2017’ लागू है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। एक्ट के नियमानुसार प्रत्येक स्कूल में फीस तय करने के लिए PTA (पैरेंट्स टीचर एसोसिएशन) और स्कूल लेवल फीस कमेटी (SLFC) बनाई जानी चाहिए। लेकिन अभिभावकों का आरोप है कि अधिकांश स्कूलों में न तो PTA का सही गठन हुआ है और न ही SLFC की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। स्कूल बिना समिति के मनमाने तरीके से फीस बढ़ा रहे हैं।

किसने क्या कहा? (विभिन्न पक्षों की राय)

  • अभिभावकों का दर्द: पेरेंट्स वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष दिनेश कांवट ने कहा, “निजी स्कूलों ने अभिभावकों को कमाई का जरिया बना रखा है। शिक्षा माफिया मनमानी कर रहे हैं और फर्जी एसएलएफसी (SLFC) बनाकर हर साल फीस बढ़ाई जा रही है।” वहीं, संयुक्त अभिभावक संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन का कहना है कि नए सत्र में भी स्कूलों ने आर्थिक दबाव बना दिया है और एडमिशन फीस में भी 10 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है। सरकार को सख्ती दिखानी चाहिए।
  • स्कूलों का तर्क: स्कूल क्रांति संघ राजस्थान की अध्यक्ष हेमलता शर्मा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, “निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी मजबूरी है। शिक्षकों के वेतन, इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली-पानी और आधुनिक सुविधाओं का खर्च हर साल बढ़ रहा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है और एक्ट को ध्यान में रखकर ही फीस बढ़ाई जाती है।”
  • सरकार का रुख: राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने स्पष्ट किया है कि फीस एक्ट की पालना के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी को सीधे शिकायत कर सकते हैं। नियमों के उल्लंघन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।” इस पूरी स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक शिक्षा विभाग और संभागीय स्तर पर बनी कमेटियां जमीन पर उतरकर सख्ती नहीं दिखाएंगी, तब तक निजी स्कूलों की यह मनमानी यूं ही चलती रहेगी।

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