जयपुर में PHED का बड़ा बदलाव: अब घर नहीं आएगा पानी का बिल! सीधे मोबाइल पर मिलेगा SMS, जानें क्या है नई व्यवस्था

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जयपुर। राजधानी जयपुर के पेयजल उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद जरूरी खबर है। बिजली कंपनियों की तर्ज पर अब जलदाय विभाग (PHED) भी पूरी तरह से ‘डिजिटल’ होने जा रहा है। विभाग ने शहर की बिलिंग प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए जुलाई माह से पानी के ‘पेपर बिल’ (कागज वाले बिल) वितरण की व्यवस्था को पूरी तरह से बंद करने का निर्णय लिया है।

अब उपभोक्ताओं को उनके जल उपभोग राशि का विवरण सीधे उनके मोबाइल फोन पर SMS के जरिए भेजा जाएगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि उपभोक्ताओं ने समय रहते अपने मोबाइल नंबर अपडेट नहीं कराए, तो उन्हें पेनाल्टी (जुर्माना) का सामना करना पड़ सकता है।

30 जून तक चलेगा विशेष अभियान

वर्तमान में विभाग के पास लाखों उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर दर्ज ही नहीं हैं। इस समस्या से निपटने के लिए जलदाय विभाग ने एक विशेष अभियान शुरू किया है, जो 30 जून तक चलेगा।

जरूरी जानकारीविवरण
क्या करना है?पानी के बिल खाते में मोबाइल नंबर दर्ज कराना है।
अंतिम तिथि30 जून 2026
कहां जाएं?अपने संबंधित सहायक अभियंता (AEN) कार्यालय में।
जुर्माना/पेनाल्टीनंबर अपडेट न होने पर बिल नहीं मिलेगा, जिससे भुगतान में देरी और पेनाल्टी लग सकती है।

जयपुर के अतिरिक्त मुख्य अभियंता अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि सभी सहायक अभियंताओं को अपने कार्यालयों में मोबाइल नंबर अपडेट करने के लिए अलग से कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

6 लाख में से सिर्फ 1.25 लाख तक ही पहुंच रहे संदेश

जलदाय विभाग ने शहर के करीब 6 लाख पेयजल उपभोक्ताओं को डिजिटल बिलिंग प्रणाली से जोड़ने की कवायद तेज कर दी है।

  • वर्तमान स्थिति: मौजूदा समय में विभाग के सर्वर में अधिकांश उपभोक्ताओं के सही मोबाइल नंबर दर्ज नहीं हैं।
  • आंकड़े: इसके चलते 6 लाख में से केवल करीब 1.25 लाख उपभोक्ताओं तक ही पानी के बिल और विभाग के अलर्ट संदेश डिजिटल रूप में पहुंच पा रहे हैं।

संकलित आंकड़ों को विभागीय सॉफ्टवेयर में अपडेट करने के बाद आगामी जुलाई माह से सभी बिल सीधे मोबाइल पर ही भेजे जाएंगे।

“राजस्व संग्रहण में भी होगा सुधार”

विभागीय अधिकारियों का मानना है कि SMS बिलिंग से वितरण व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी। पेपर बिल के गुम होने या देरी से पहुंचने की शिकायतें दूर होंगी और इससे विभाग के राजस्व संग्रहण (Revenue Collection) में भी सुधार आएगा।

आखिर क्यों बंद करनी पड़ी पुरानी व्यवस्था?

जलदाय विभाग के इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य कारण ‘स्टाफ की भारी कमी’ है।

विभाग में मीटर रीडरों और मीटर इंस्पेक्टर के कई पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। इसके चलते जयपुर शहर के अधिकांश उपखंडों में पानी के मीटरों की रीडिंग और पेपर बिल बांटने की व्यवस्था बीते कई महीनों से ठप पड़ी थी।

विवाद से बचने का निकाला रास्ता:

स्टाफ न होने के कारण विभाग शहरी उपभोक्ताओं को एक साथ चार से छह महीने का पानी का बिल भेज रहा था। जब उपभोक्ताओं के पास एक साथ इतनी बड़ी राशि का बिल आता था, तो सहायक अभियंता कार्यालयों में जलदायकर्मियों और आम जनता के बीच भारी विवाद और नोकझोंक की स्थिति पैदा हो जाती थी। इसी रोज-रोज के विवाद और बिल वितरण की लचर व्यवस्था को सुधारने के लिए विभाग ने डिजिटल राह चुनी है।

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