जयपुर: विश्व धरोहर स्मारक जंतर-मंतर (ज्योतिष यंत्रालय) जयपुर में आषाढ़ी वायु धारिणी पूर्णिमा (29 जुलाई 2026) के अवसर पर परंपरा के अनुसार सूर्यास्त काल में ध्वज पूजन और वायु परीक्षण संपन्न हुआ। 105 फीट ऊंचे (करीब 27 मीटर) सम्राट यंत्र पर ध्वज स्थापित कर किए गए इस परीक्षण के आधार पर शहर के प्रख्यात ज्योतिषाचार्यों ने सावन और भाद्रपद मास में श्रेष्ठ वर्षा होने की संभावना जताई है।
पूर्व से पश्चिम चला हवा का प्रवाह, शास्त्रों के अनुसार श्रेष्ठ वर्षा के योग
कार्यालय अधीक्षक, जंतर-मंतर द्वारा जारी प्रेस-नोट और वरिष्ठ ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सूर्यास्त के समय दो मिनट पहले और दो मिनट बाद की स्थिति का अध्ययन किया गया। इस दौरान हवा का मुख्य प्रवाह पूर्व से पश्चिम की दिशा में दर्ज किया गया।
- प्रो. डॉ. विनोद शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार पूर्व से पश्चिम की ओर हवा का चलना श्रेष्ठ वर्षा का सूचक माना जाता है।
- हालांकि, अन्य ज्योतिषीय योगों और चातुर्मास के 37 कुल योगों (20 श्रेष्ठ वर्षा कारक और 17 दुर्भिक्ष कारक योग) के तुलनात्मक अध्ययन से यह संकेत भी मिले हैं कि वर्षभर के योगायोग के अनुसार कहीं खंडवृष्टि, कहीं अतिवृष्टि तो कहीं कम बारिश (अनावृष्टि) की स्थिति भी बन सकती है।
संवत् 2083 के वर्षा और चातुर्मास से जुड़े अन्य ज्योतिषीय पहलू
इस वर्ष के गर्भाधान काल से प्रसव पर्यंत तक के आकाशीय लक्षणों और ग्रह योगों के आधार पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं:
- संवत् 2083 का नाम रौद्र होने के कारण शासकों में उत्तेजना और प्रजा में आपसी वैर-भाव बढ़ने की आशंका है, जिससे धान्यादी की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
- संवत के राजा गुरु होने से प्रजा में सुख-समृद्धि बढ़ेगी और समय पर वर्षा से अन्नोत्पादन में वृद्धि होगी। वहीं मंत्री मंगल के प्रभाव से असामयिक वर्षा और आंशिक अशांति रह सकती है।
- धान्येश बुध और मेघेश चंद्रमा के प्रभाव से वर्षा श्रेष्ठ होगी तथा फल-फूल व अन्न की प्रचुरता से बाजार में सस्ताई रहने की संभावना है।
- इस वर्ष रोहिणी का वास समुद्र में होने और संवत का वाहन चातक होने से श्रेष्ठ वर्षा और जनता की धार्मिक व पर्यटन में रुचि बढ़ने के योग हैं।
विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति
यह वायु परीक्षण कार्यक्रम प्रो. डॉ. विनोद शास्त्री, प्रो. भास्कर श्रोत्रिय, प्रो. विनोद कुमार शर्मा, प्रो. शालिनी सक्सेना, डॉ. लता श्रीमाली, डॉ. मुकेश शर्मा, पं. शिवदत्त शास्त्री, डॉ. विजेन्द्र शर्मा, डॉ. आलोक शर्मा, पं. चन्द्रमोहन दाधिच और पं. बृजबिहारी शर्मा के सान्निध्य में संपन्न हुआ। इस दौरान पुरातत्व विभाग की अधीक्षक श्रीमती प्रतिभा यादव, हवामहल अधीक्षक सरोजनी चंचलानी और राजस्थान धरोहर संग्रहालय के अधीक्षक मोहम्मद आरिफ भी उपस्थित रहे।