जयपुर में सड़कों पर ‘मौत का डिजिटल खेल’: विज्ञापन के लालच में सुरक्षा ताक पर, भोपाल की बड़ी गलती दोहरा रहा नगर निगम

राजधानी जयपुर की सड़कों के किनारे लगाए जा रहे डिजिटल एलईडी विज्ञापनों ने शहर की यातायात सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साल 2019 में जिस प्रयोग को ‘खतरे की घंटी’ मानकर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी, जयपुर नगर निगम अब उसी गलती को दोहरा रहा है। हैरानी की बात यह है कि शहर के सबसे व्यस्ततम चौराहों पर वैध की आड़ में अवैध डिजिटल स्क्रीन लगाने का काम तेजी से चल रहा है और प्रशासन मौन साधे बैठा है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: ‘सेकंड्स’ की चूक पड़ेगी भारी

ट्रैफिक इंजीनियरिंग विशेषज्ञों और ‘इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ के विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल स्क्रीन सड़क की दृश्यता को प्रभावित करती हैं। ये स्क्रीन वाहन चालकों का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं, जिससे उनकी ‘प्रतिक्रिया समय’ (Response Time) कम हो जाता है। व्यस्त चौराहों, सिग्नल और मोड़ों के पास ऐसी स्क्रीन अचानक वाहन नियंत्रण खोने और गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं।

3 करोड़ के फेर में 100 करोड़ का नुकसान

नगर निगम के इस कदम से न केवल सुरक्षा, बल्कि राजस्व पर भी संकट मंडरा रहा है।

  • वर्तमान में निगम को होर्डिंग, बीओटी और अन्य विज्ञापन साइटों से सालाना 100 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है।
  • राजस्व शाखा के जानकारों की मानें तो एलईडी स्क्रीन को बढ़ावा देने से इन साइटों की मांग कम हो जाएगी।
  • मात्र 3 करोड़ रुपये की संभावित आय के लिए निगम 100 करोड़ रुपये के सुरक्षित राजस्व को दांव पर लगा रहा है।

जमीनी हकीकत: नियमों को ताक पर रखकर फुटपाथ पर कब्जा

पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि रामलीला मैदान के कोने में फुटपाथ छोड़कर सड़क सीमा के भीतर एलईडी डिस्प्ले का पोल लगा दिया गया है। इसी तरह रामबाघ चौराहे और एपेक्स सर्कल पर भी अवैध रूप से स्क्रीन लगाई गई हैं। इन पर पल-पल में विज्ञापन बदलते रहते हैं, जो चालक की एकाग्रता को तोड़ते हैं।

विपक्ष का हमला: “सड़कों पर मौत का डिजिटल खेल”

नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष गिरिराज खंडेलवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “नगर निगम ने कमाने और चहेतों को फायदा पहुंचाने के लालच में सड़कों पर मौत का डिजिटल खेल चालू कर दिया है। रामबाघ चौराहे को एलईडी स्क्रीन से पाट दिया गया है। जब हादसे होंगे तो निगम पुलिस पर जिम्मेदारी डालेगा। इन स्क्रीन को तत्काल प्रभाव से बंद करना चाहिए।”

विशेषज्ञों का कहना है कि बिना किसी ट्रैफिक स्टडी और रोड सेफ्टी ऑडिट के इस तरह के प्रयोग करना जयपुरवासियों की जान के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।

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