₹360 करोड़ का ‘डिजिटल डाका’! राजस्थान शिक्षा विभाग में ICT लैब टेंडर का महाघोटाला

जयपुर। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के गलियारों में इन दिनों ₹360 करोड़ के एक ऐसे ‘डिजिटल घोटाले’ की गूंज है, जिसने पूरे महकमे की शुचिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ICT लैब स्थापित करने के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर ‘टेंडर सेटिंग’ का बड़ा खेल खेला गया है।

9 महीने में ‘भ्रष्ट’ से ‘साफ-सुथरी’ कैसे हुईं कंपनियां?

हैरानी की बात यह है कि करीब 9 महीने पहले जिन कंपनियों के काम में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं और जिन पर खुद शिक्षा विभाग ने ‘भ्रष्टाचार’ की मुहर लगाकर टेंडर निरस्त किए थे, आज वही कंपनियां फिर से विभाग के अंदर ‘बैकडोर’ से एंट्री पा चुकी हैं। सवाल यह है कि क्या 9 महीने के भीतर इन कंपनियों के सारे दाग धुल गए, या फिर विभाग के ‘बड़े मगरमच्छों’ ने मिलकर ₹360 करोड़ की मलाई आपस में बांटने की तैयारी कर ली है?

Live Sach के तीखे सवाल:

  1. टेंडर की शर्तें क्यों बदली गईं? क्या टेंडर की शर्तों को इस तरह से ‘कस्टमाइज़’ किया गया ताकि चुनिंदा दागी कंपनियों को ही फायदा पहुँचे?
  2. मंत्री की साख पर दांव: जब शिक्षा मंत्री ने खुद इन कंपनियों के खिलाफ सख्ती दिखाई थी, तो उनके अधीनस्थ अधिकारियों ने उन्हीं कंपनियों को दोबारा वर्क ऑर्डर कैसे जारी कर दिए?
  3. छात्रों के भविष्य से खिलवाड़: ₹360 करोड़ का बजट छात्रों को डिजिटल बनाने के लिए था, लेकिन क्या यह पैसा सिर्फ कागजी लैब और अफसरों की जेब भरने में खर्च होगा?

अंदर की खबर: अफसरों और माफिया का गठजोड़

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे खेल में शिक्षा परिषद के कुछ रसूखदार अधिकारी और टेंडर माफिया के बीच की सांठगांठ बेहद मजबूत है। टेंडर प्रक्रिया के दौरान कई ऐसी तकनीकी खामियों को नजरअंदाज किया गया, जो किसी भी निष्पक्ष जांच में पकड़ी जा सकती हैं।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

Live Sach इस महाघोटाले को बेनकाब करने के साथ ही मांग करता है कि इस ₹360 करोड़ की टेंडर प्रक्रिया की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। उन चेहरों को बेनकाब करना ज़रूरी है जिन्होंने ‘डिजिटल राजस्थान’ के सपने को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया है।

Live Sach – तेज़, भरोसेमंद हिंदी समाचार। राजनीति, राजस्थान से ब्रेकिंग न्यूज़, मनोरंजन, खेल और भारत की हर बड़ी खबर!

Share This Article