राष्ट्रीय प्रतीक के सम्मान के लिए 13 वर्षीय किम की पहल: प्रधानमंत्री को खत लिखकर एयर इंडिया वन के दरवाजे को लेकर की यह मांग

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डूंगरपुर: अक्सर हम मानते हैं कि राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा, सरकारी व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल से जुड़े मुद्दों पर केवल बड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों की ही नजर रहती है। लेकिन, राजस्थान के डूंगरपुर की एक 13 वर्षीय स्कूली छात्रा ने इस धारणा को बदल दिया है। 8वीं कक्षा में पढ़ने वाली किम सोमपुरा ने अपनी सूक्ष्म दृष्टि से एक ऐसी बात पकड़ी, जिस पर अब तक किसी का ध्यान नहीं गया था। इस छात्रा ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ‘एयर इंडिया वन’ (Air India One) विमान को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और अनोखा सुझाव भेजा है।

क्या देखा किम ने, जो विशेषज्ञ भी नहीं देख पाए?

किम सोमपुरा प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं की खबरें और तस्वीरें नियमित रूप से टीवी और समाचारों में देखती हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री की फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा के दौरान टीवी पर प्रसारित तस्वीरों को देखते हुए किम ने एक विशेष बात पर गौर किया।

  • अधूरी दिखती है राष्ट्रीय प्रतीक की छवि: किम ने पाया कि प्रधानमंत्री के विशेष विमान ‘एयर इंडिया वन’ के प्रवेश द्वार के ठीक पास राष्ट्रीय प्रतीक ‘अशोक स्तंभ’ बना हुआ है।
  • दरवाजा खुलने पर छिप जाता है स्तंभ: जब भी विमान का मुख्य दरवाजा खुलता है, तो अशोक स्तंभ का एक बड़ा हिस्सा दरवाजे के पीछे ढक जाता है, जिससे उसकी पूरी आकृति दिखाई नहीं देती।

प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दिया यह सुझाव

किम का मानना है कि जब प्रधानमंत्री किसी देश के दौरे पर जाते हैं, तो उनके विमान से उतरने और चढ़ने के दृश्य दुनिया भर के मीडिया में प्रमुखता से लाइव दिखाए जाते हैं। ऐसे में भारत के राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक स्तंभ) की अधूरी छवि का पूरी दुनिया में प्रसारित होना उचित नहीं है।

इसी सोच के साथ किम ने बिना किसी झिझक के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को एक पत्र लिखा। अपने पत्र में उसने सुझाव दिया है कि:

“राष्ट्रीय प्रतीक को विमान पर ऐसी जगह स्थापित किया जाना चाहिए, जहां दरवाजा खुलने के बावजूद वह हर स्थिति में पूर्ण रूप से दिखाई दे। यह केवल एक चित्र नहीं, बल्कि देश की पहचान और हमारे गौरव का प्रतीक है।”

जागरूक नागरिक की पेश की मिसाल

हैरानी की बात यह है कि जिस तकनीकी और प्रोटोकॉल से जुड़ी खामी को वर्षों से बड़े-बड़े अधिकारी, एविएशन विशेषज्ञ और सुरक्षा एजेंसियां नहीं देख पाईं, उसे एक 13 साल की बच्ची ने अपनी सजगता से पकड़ लिया।

डूंगरपुर की इस बालिका की पहल अब पूरे इलाके और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। किम का यह कदम साबित करता है कि देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने और राष्ट्रहित में सोचने के लिए उम्र नहीं, बल्कि एक जागरूक सोच की जरूरत होती है। लोग किम को एक जिम्मेदार नागरिक की शानदार मिसाल के रूप में देख रहे हैं।

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