अलवर के सिलीसेढ़ बांध के भराव क्षेत्र और सरिस्का बाघ परियोजना के बफर जोन में बने अवैध ‘देसी ठाठ’ रिसोर्ट को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला कानूनी और प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। जिस अवैध रिसोर्ट को अलवर नगर विकास न्यास (UIT) ने सील किया था और राजस्थान हाई कोर्ट ने उस कार्रवाई को वैध ठहराया था, उसी रिसोर्ट को जयपुर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-द्वितीय ने न सिर्फ खोलने के आदेश दिए, बल्कि आयोग के अध्यक्ष खुद मौके पर जाकर सील खुलवाकर लौटे।
क्या है पूरा मामला?
जयपुर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-द्वितीय के अध्यक्ष जीएल मीना और सदस्य सुप्रिया अग्रवाल ने 16 जनवरी 2026 को इस रिसोर्ट की सील खोलने के आदेश दिए थे।
- जब UIT ने इस मामले को उपभोक्ता अदालत के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) से बाहर का बताया, तो आयोग के अध्यक्ष ने स्वयं विवादित संपत्ति का निरीक्षण करने और आदेश की पालना कराने का निर्देश जारी कर दिया।
- 13 फरवरी को अध्यक्ष स्वयं अलवर मौके पर पहुंचे और सील खुलने के बाद ही वहां से वापस लौटे।
- UIT ने इस आदेश के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील भी की, लेकिन उसे इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि जिला आयोग के आदेश की पालना (सील खोलने की कार्रवाई) पहले ही हो चुकी है।
1.10 हैक्टेयर का विवाद और कानूनी लड़ाई का सफर
यह ‘देसी ठाठ’ रिसोर्ट 1.10 हैक्टेयर में फैला है। जमीन को संदीप खंडेलवाल ने 2013 में खरीदा था और उनकी कंपनी मैसर्स सैन रेजीडेंसी ने UIT में लैंड कन्वर्जन (भू-रूपांतरण) के लिए आवेदन किया था, जिसे UIT ने 2015 में खारिज कर दिया था।
- 2019 और 2022: कंपनी ने संभागीय आयुक्त (जयपुर) कोर्ट में अपील की। 2022 में UIT को सुनवाई के आदेश हुए।
- सील की कार्रवाई: UIT ने सुनवाई के बाद कन्वर्जन से इनकार करते हुए पिछले साल 13 दिसंबर को रिसोर्ट को सील कर दिया।
- हाई कोर्ट का फैसला: इस मामले में एडीजे कोर्ट ने सील खोलने का अंतरिम आदेश दिया था, जिस पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी। इसके बाद हाई कोर्ट ने UIT की अंतिम आदेश की कार्रवाई (सील करने) को सही माना था।
उपभोक्ता आयोग का तर्क: रेवेन्यू-सिविल कोर्ट जैसा फैसला
उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में जो तर्क दिए हैं, वे आमतौर पर रेवेन्यू या सिविल कोर्ट के फैसलों में देखने को मिलते हैं। आयोग ने अपने आदेश में लिखा:
- भराव क्षेत्र में नहीं है रिसोर्ट: आयोग ने माना कि रिसोर्ट की भूमि बांध के भराव क्षेत्र में नहीं है और इसके पक्के निर्माण से पानी की आवक में कोई रुकावट नहीं है।
- आजीविका और बुकिंग का हवाला: परिवादी भूमि पर बतौर मालिक काबिज है और इसका उपयोग आजीविका के लिए किया जा रहा है। विवाह कार्यक्रमों के लिए नवंबर 2026 तक रिसोर्ट की बुकिंग हो रखी है, फिर भी इसे सील कर दिया गया।
- मानवीय आधार पर राहत: आयोग ने कहा कि ऐसी स्थिति में मानवीय आधार पर अविलंब सील खोला जाना अति आवश्यक है। आयोग ने UIT के अतिक्रमण निरोधक अधिकारी, तहसीलदार और एसएचओ (अकबरपुर) को सीलशुदा भवन की सील तुरंत खोलने का आदेश दिया।
