राजस्थान में मेडिकल स्ट्राइक: निजी अस्पताल के निदेशक की गिरफ्तारी पर बवाल, जयपुर-कोटा में इमरजेंसी सेवाएं ठप

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राजस्थान की राजधानी जयपुर समेत कई शहरों में आज निजी चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। जयपुर के निविक हॉस्पिटल (Nivic Hospital) के निदेशक डॉ. सोनदेव बंसल की गिरफ्तारी के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) राजस्थान और प्राईवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन ने 24 घंटे की हड़ताल का आह्वान किया है।

इमरजेंसी और ओपीडी सेवाएं बंद आज सुबह 8 बजे से शुरू हुई यह हड़ताल कल (15 अप्रैल) सुबह 8 बजे तक जारी रहेगी। जयपुर के प्रतिष्ठित अस्पतालों जैसे सी.के. बिरला, साकेत और फोर्टिस में डॉक्टरों ने ओपीडी चैंबर का बहिष्कार किया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस बार डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाओं को भी बंद रखने का निर्णय लिया है, जिससे गंभीर मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, अस्पतालों में पहले से भर्ती (IPD) मरीजों का उपचार जारी है।

क्या है पूरा मामला? यह विवाद 12 अप्रैल (रविवार) को शुरू हुआ जब जयपुर पुलिस ने डॉ. सोनदेव बंसल को जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार किया। पुलिस का आरोप है कि डॉक्टर ने मरीजों के दस्तावेजों में कांटछांट कर उन्हें RGHS (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) की वेबसाइट पर अपलोड किया था। डॉक्टरों के संगठनों का कहना है कि यह गिरफ्तारी गलत तरीके से की गई है और इसमें प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।

सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा बोझ आज अंबेडकर जयंती के कारण राजकीय अवकाश है, जिससे सरकारी अस्पतालों में भी ओपीडी केवल सुबह दो घंटे (9 बजे तक) ही चली। ऐसे में निजी अस्पतालों की हड़ताल ने मरीजों की मुसीबत को दोगुना कर दिया है। कोटा में भी हार्ट सर्जन डॉ. पलकेश के नेतृत्व में निजी अस्पतालों ने पूर्ण कार्य बहिष्कार किया है।

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डॉक्टरों की प्रमुख मांगें:

  • डॉ. सोनदेव बंसल को तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाए।
  • RGHS योजना से संबंधित तकनीकी और प्रशासनिक मुद्दों के समाधान के लिए डॉक्टरों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाए।
  • भविष्य में किसी भी डॉक्टर की गिरफ्तारी से पहले चिकित्सा संगठनों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए।

Impact Points: हड़ताल का असर

  • जयपुर: गोपालपुरा बाईपास, मानसरोवर और जेएलएन मार्ग के सभी प्रमुख निजी अस्पताल प्रभावित।
  • कोटा: आईएमए के बैनर तले 24 घंटे के लिए पूर्ण मेडिकल लॉकडाउन।
  • मरीज: ओपीडी पर्चे बंद होने के कारण सैकड़ों मरीज बिना इलाज वापस लौटे।

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