यपुर में फाइलों में दौड़ रहीं JDA की ‘सेक्टर सड़कें’: ₹900 करोड़ स्वीकृत, खर्च हुए मात्र ₹150 करोड़; 200 से अधिक प्रोजेक्ट्स अटके

जयपुर: जयपुर शहर के विस्तार और ट्रैफिक के भारी दबाव को कम करने के लिए बनाए गए ‘मास्टर प्लान’ के सपने अब हकीकत में धूल फांक रहे हैं। शहरवासियों को चौड़ी-चौड़ी सेक्टर सड़कों (Sector Roads) का जो सपना दिखाया गया था, वह आज भी केवल कागजों और फाइलों तक ही सीमित है। जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की कार्यशैली का आलम यह है कि शहर में 200 से अधिक सेक्टर सड़कें या तो शुरू ही नहीं हो पाई हैं या उन्हें बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया है।

बजट की कमी नहीं, इच्छाशक्ति का अभाव

जेडीए की सुस्त चाल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन सेक्टर सड़कों के निर्माण के लिए 900 करोड़ रुपए से अधिक की स्वीकृति दी गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अब तक महज 150 करोड़ रुपए के ही कार्यादेश (Work Orders) जारी हो पाए हैं। निर्माण कार्य केवल गिने-चुने हिस्सों में ही शुरू हो सका है, जबकि इन रास्तों को बनाने के लिए पिछले दो वर्षों से केवल बैठकों का दौर चल रहा है।

📊 फैक्ट बॉक्स: जेडीए रीजन में सेक्टर सड़कों का कच्चा चिट्ठा

  • कुल सेक्टर रोड: 6,904
  • सड़कों की कुल लंबाई: 6,341 किलोमीटर
  • आंतरिक जोन: 90% से अधिक सड़कों का निर्माण पूरा।
  • बाहरी जोन: 50% सड़कों का काम भी पूरा नहीं हो पाया है।

ग्राउंड रियलिटी: नक्शे में रोड, मौके पर फसल

जेडीए के कागजों में जगतपुरा, प्रतापनगर एक्सटेंशन, सांगानेर, महल रोड, सीकर रोड, सिरसी रोड और अजमेर रोड के आस-पास कई ऐसी सेक्टर सड़कें दर्ज हैं, जो नक्शे में तो साफ दिखाई देती हैं, लेकिन मौके पर वहां पक्के मकान खड़े हैं या बाकायदा खेती हो रही है। भांकरोटा से सिरसी रोड को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण सेक्टर रोड के बड़े हिस्से में आज भी फसलें लहलहा रही हैं। अधूरे रास्तों के कारण बारिश में कीचड़ और गर्मियों में उड़ती धूल लोगों की नियति बन चुकी है।

एक्सपर्ट व्यू: क्यों जरूरी हैं सेक्टर सड़कें?

सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक चंद्रशेखर पाराशर का कहना है कि मास्टरप्लान-2025 के रोड नेटवर्क को सही तरह से विकसित नहीं किया गया। सेक्टर रोड्स शहर के ट्रैफिक को बांटने के लिए बनाई जाती हैं। इन सड़कों के अधूरे रहने का ही परिणाम है कि आज पूरा ट्रैफिक जयपुर के कुछ चुनिंदा मार्गों पर सिमट गया है, जिससे टोंक रोड और अजमेर रोड जैसे प्रमुख मार्गों पर घंटों जाम लगा रहता है। जोन कार्यालय, प्रवर्तन शाखा और इंजीनियरिंग विंग को मिलकर अतिक्रमण हटाने की सख्त जरूरत है।

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