सार्वजनिक सेवा में अपने 25 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर (#25YearsOfSeva) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बचपन से जुड़ा एक बेहद प्रेरक किस्सा साझा किया है। पीएम मोदी ने अपने गृह नगर वडनगर के स्कूल के दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वे स्कूल जाते थे, तो उनके मास्टर जी अलग-अलग पाठ पढ़ाते थे। उन्होंने याद किया कि वे हमेशा क्लास में सबसे पहले पहुंचने वाले विद्यार्थियों में शामिल रहा करते थे। बचपन की उस उत्सुकता का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सीखने की वो ललक अब उनके जीवन का एक स्थायी हिस्सा बन चुकी है।
पीएम मोदी ने एक बड़ा और विनम्र संदेश देते हुए कहा कि वे आज भी स्वयं को एक ‘स्टूडेंट’ (विद्यार्थी) ही मानते हैं और हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश करते हैं। उन्होंने अपनी इस भावना को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने मंदिर में ईश्वर से विशेष रूप से यह प्रार्थना की है कि उनकी सीखने की शक्ति कभी कम न हो। प्रधानमंत्री के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जीवन में जितना अधिक सीखता है, देश और समाज के लिए कुछ बेहतर करने का उसका सामर्थ्य भी उसी अनुपात में बढ़ता जाता है। उनका यह बयान दर्शाता है कि देश के सर्वोच्च पद पर होने के बावजूद उनके भीतर का ‘विद्यार्थी’ हमेशा जीवित है, जो उन्हें निरंतर देश की प्रगति के लिए काम करने की ऊर्जा देता है।
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