नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में देशभर के कृषि विभागों का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन (National Agriculture Conference) आयोजित किया गया। इस महासम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने हिस्सा लिया और देशभर से आए कृषि मंत्रियों तथा उच्चाधिकारियों को संबोधित किया। अपने संबोधन में शिवराज सिंह ने पुराने ढर्रे पर चल रहे कामकाज के तरीकों पर तीखा प्रहार करते हुए कृषि सुधारों और किसानों के कल्याण के लिए एक नई कार्य-संस्कृति विकसित करने का कड़ा संदेश दिया।
“डूब कर काम करें, खेती रोम-रोम में बसी हो”
सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, “मित्रों, अब हमें दिन-रात मेहनत करनी पड़ेगी। हम पूरी तरह डूब कर काम करें और मेहनत से काम करें। हमारी सोच ऐसी होनी चाहिए कि खेती हमारे रोम-रोम में रमी हो और किसान हमारी हर सांस में बसा हो।” उन्होंने पिछली सरकारों और पुराने सिस्टम पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसे खरीफ सम्मेलन पहले कभी नहीं हुए। पहले यह महज एक दिन का औपचारिकता वाला कार्यक्रम होता था। मंत्री जी आते थे, 20 मिनट का भाषण देकर निकल लेते थे और अधिकारी भी इसे गंभीरता से नहीं लेते थे। राज्यों से सीनियर अधिकारी आने की बजाय किसी भी जूनियर अधिकारी को भेज दिया जाता था। लेकिन अब यह संस्कृति बदलनी होगी।
एक मंच पर इतने कृषि मंत्री पहले कभी नहीं आए
शिवराज सिंह चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि क्षेत्र के इतिहास में शायद यह पहला अवसर है जब देश के इतने सारे राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर उपस्थित हुए हैं। उन्होंने मंच से सभी कृषि मंत्रियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अब कुछ विशेष क्षेत्रों पर हमें बहुत ध्यान से और मिशन मोड में काम करने की आवश्यकता है।
दलहन मिशन और लगातार समीक्षा पर जोर
देश में दालों की उपलब्धता और पैदावार बढ़ाने पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “दलहन मिशन (Pulses Mission) में हमें और गहराई से काम करना है। यह सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, इसलिए समय-समय पर इसकी कड़ी समीक्षा भी होनी चाहिए।” उन्होंने सभी राज्यों से दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए नई रणनीतियां अपनाने की अपील की।
“सही समय पर अच्छे बीज पहुंचाना आज भी चुनौती”
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के प्रयासों की सराहना करते हुए शिवराज सिंह ने एक बड़ी चिंता भी जाहिर की। उन्होंने कहा, “मुझे भी कई बार इस बात की चिंता होती है कि किसानों को आज भी सही समय पर अच्छे और उन्नत बीजों की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। ICAR ने बीजों की कई नई और उन्नत किस्में रिलीज की हैं, जिनके शानदार परिणाम भी निकले हैं। लेकिन इसके बावजूद सही समय पर सही बीज किसान के खेत तक पहुंचना आज भी हमारे लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।”
अंत में, केंद्रीय कृषि मंत्री ने सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों और उच्चाधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि आने वाली खरीफ की फसल (Kharif Crops) के लिए हर हाल में यह सुनिश्चित किया जाए कि किसानों तक सही बीज, सही समय पर पहुंच जाएं ताकि उनकी पैदावार और आय में बढ़ोतरी हो सके।