देश की कर प्रणाली में बुधवार, 1 अप्रेल 2026 से एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हो रही है। केंद्र सरकार ने 65 साल पुराने ‘आयकर अधिनियम 1961’ को रिटायर कर उसकी जगह ‘नया आयकर अधिनियम 2025’ लागू कर दिया है। यह सिर्फ संशोधनों का पुलिंदा नहीं, बल्कि पूरी कर व्यवस्था का एक व्यापक ‘ओवरहॉल’ है। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है: कानून को सरल बनाना, प्रक्रियाओं को डिजिटल करना और करदाताओं के लिए अनुपालन (Compliance) को आसान बनाना।
जटिलता खत्म: अब होगा सिर्फ ‘टैक्स ईयर’
अब तक करदाता ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ के फेर में उलझे रहते थे। नए कानून में इस जटिलता को खत्म कर सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ की अवधारणा लागू की गई है। साथ ही, 800 से अधिक धाराओं वाले बोझिल कानून को घटाकर मात्र 536 धाराओं में समेटा गया है, जिससे कानूनी पेचीदगियां काफी कम होंगी।
ई-मेल और सोशल मीडिया पर होगी विभाग की नजर
डिजिटल इंडिया के दौर में आयकर विभाग भी पूरी तरह हाई-टेक हो गया है। ‘वर्चुअल डिजिटल स्पेस’ की नई परिभाषा के तहत विभाग को जांच के दौरान करदाता के ई-मेल, सोशल मीडिया अकाउंट और क्लाउड प्लेटफॉर्म तक पहुंच का कानूनी अधिकार होगा। इसका उद्देश्य बेहिसाबी लेन-देन और डिजिटल संपत्तियों पर पैनी नजर रखना है।
नया टैक्स स्लैब: राजस्थान समेत पूरे देश को राहत
नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) को और अधिक आकर्षक बनाया गया है। अब कम छूट लेकिन कम दर के सिद्धांत पर टैक्स लगेगा:
| आय की सीमा | टैक्स की दर |
| 0 से 4 लाख तक | शून्य (0%) |
| 4 से 8 लाख तक | 5% |
| 8 से 12 लाख तक | 10% |
| 12 से 16 लाख तक | 15% |
| 24 लाख से ऊपर | 30% |
फॉर्म 16 को कहें अलविदा, अब आएगा ‘फॉर्म 130’
सैलरी क्लास के लिए यह सबसे बड़ा बदलाव है। अब सालों से चले आ रहे फॉर्म 16 का अस्तित्व खत्म हो जाएगा, इसकी जगह अब फॉर्म 130 लेगा। इसी तरह, टैक्स डॉक्यूमेंट 26-एएस (26-AS) का नाम बदलकर अब फॉर्म 168 कर दिया गया है।
पुराना vs नया: मुख्य बदलाव एक नजर में
| विशेषता | आयकर अधि. 1961 | आयकर अधि. 2025 (नया) |
| मुख्य उद्देश्य | जटिल ढांचा, कई संशोधन | सरलता व पूर्ण डिजिटलीकरण |
| मानक कटौती (Standard Deduction) | 50,000 रुपये | 75,000 रुपये |
| शब्दावली | असेसमेंट व फाइनेंशियल ईयर | सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ |
| रिटर्न सुधार (Correction) | 2 वर्ष का समय | 4 वर्ष का समय |
| वरिष्ठ नागरिक TDS छूट | 50,000 रुपये तक | 1,00,000 रुपये तक |
| विवाद निवारण | लंबी अदालती प्रक्रिया | फेसलेस व ऑनलाइन समाधान |
एक्सपर्ट कमेंट:
“नए एक्ट में धाराओं को कम करना और भाषा को सरल बनाना सरकार का ‘स्वैच्छिक अनुपालन’ पर बड़ा दांव है। अब करदाताओं को अपनी पुरानी आदतों को छोड़कर ‘डिजिटल-फर्स्ट’ मानसिकता अपनानी होगी।”
— संजीव भूतड़ा, चार्टर्ड एकाउंटेंट व टैक्स विशेषज्ञ
