सांसदों के सस्पेंशन पर बिफरे हनुमान बेनीवाल, केंद्र सरकार को सुनाई खरी-खरी

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नई दिल्ली, संसद के मौजूदा सत्र में 8 विपक्षी सांसदों के निलंबन के बाद मचे घमासान के बीच नागौर सांसद और आरएलपी (RLP) प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। बेनीवाल ने सांसदों के निलंबन को अलोकतांत्रिक बताते हुए सत्ता पक्ष को विपक्ष की बात सुनने की सलाह दी है।

बेनीवाल का अनुभव: “4 बार विधायक, 5 बार निलंबन”

सांसदों के आचरण और सदन की मर्यादा पर बात करते हुए हनुमान बेनीवाल ने अपना पुराना अनुभव साझा किया। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा, “मैं खुद चार बार विधायक रहा और पांच बार निलंबित हुआ हूँ। निलंबन की राजनीति नई नहीं है, लेकिन जिस तरह से अब कार्रवाई हो रही है, वह ठीक नहीं है।”

सत्ता पक्ष को दी ‘सुनने’ की सलाह

बेनीवाल ने कहा कि बात-बात पर सांसदों को निलंबित करना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि संसद बहस का मंच है, न कि एकतरफा कार्यवाही का। उनके बयान की 5 बड़ी बातें इस प्रकार हैं:

  1. सुनने में हर्ज क्या है?: बेनीवाल ने कहा कि जब राहुल गांधी या अन्य विपक्षी नेता अपनी बात रख रहे थे, तो उन्हें सुना जाना चाहिए था। सत्ता पक्ष को सुनने की ताकत रखनी चाहिए।
  2. छोटे दलों की उपेक्षा न हो: सरकार को विपक्ष और विशेषकर छोटे दलों की बात को प्राथमिकता देनी चाहिए।
  3. लोकतंत्र पर प्रहार: सांसदों का थोक में निलंबन करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
  4. संवाद की कमी: लोकसभा अध्यक्ष को निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई से पहले सभी दलों के साथ बैठकर संवाद स्थापित करना चाहिए था।
  5. सदन की कार्यवाही: एकतरफा कार्यवाही से सदन का गतिरोध कभी खत्म नहीं होगा, इसके लिए विपक्ष को विश्वास में लेना जरूरी है।

सांसद बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास करेगी, तो सदन की गरिमा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया दोनों को नुकसान पहुंचेगा।

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