आज देश भर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। ‘सिंबल ऑफ नॉलेज’ कहे जाने वाले बाबासाहेब का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। उन्होंने न केवल भारत का संविधान लिखा, बल्कि समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
आरबीआई (RBI) की स्थापना में योगदान बहुत कम लोग जानते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की परिकल्पना बाबासाहेब के विचारों पर आधारित थी। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘The Problem of the Rupee: Its Origin and Its Solution’ में जो सुझाव दिए थे, उन्हीं के आधार पर हिल्टन यंग कमीशन ने आरबीआई की रूपरेखा तैयार की थी।
श्रमिकों के लिए मसीहा आज भारत में काम के घंटे जो 8 घंटे तय हैं, उसका श्रेय बाबासाहेब को जाता है। उनके प्रयासों से पहले भारत में श्रमिकों को 12 से 14 घंटे काम करना पड़ता था। 1942 में श्रम मंत्री के रूप में उन्होंने इसे बदलकर 8 घंटे करवाया था।
शिक्षा और विद्वत्ता बाबासाहेब के पास कुल 32 डिग्रियां थीं। वे 9 भाषाओं के ज्ञाता थे और उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से केवल 2 साल 3 महीने में अपनी पढ़ाई पूरी की थी, जिसके लिए आमतौर पर 8 साल का समय लगता है।
Interesting Facts about Babasaheb Ambedkar
- तिरंगे में अशोक चक्र: भारतीय ध्वज में ‘अशोक चक्र’ को जगह दिलाने का मुख्य श्रेय डॉ. अंबेडकर को जाता है। उन्होंने ही चरखे की जगह न्याय के प्रतीक चक्र को शामिल करने की वकालत की थी।
- सबसे बड़ी निजी लाइब्रेरी: बाबासाहेब की निजी लाइब्रेरी ‘राजगीर’ में 50,000 से अधिक पुस्तकें थीं, जिसे उस समय दुनिया की सबसे बड़ी निजी लाइब्रेरी माना जाता था।
- विदेश में डॉक्टरेट: वे विदेश (कोलंबिया विश्वविद्यालय) से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट (Ph.D.) की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले भारतीय थे।
- कोलंबिया यूनिवर्सिटी का सम्मान: वर्ष 2004 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने अपने 250 साल पूरे होने पर दुनिया के शीर्ष 100 विद्वानों की सूची जारी की थी, जिसमें डॉ. अंबेडकर का नाम पहले स्थान पर था।
- नदी घाटी परियोजनाएं: भारत की दामोदर घाटी परियोजना, हीराकुंड परियोजना और सोन नदी परियोजना जैसी बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं की रूपरेखा उन्होंने ही तैयार की थी।
- बौद्ध धर्म में परिवर्तन: 1956 में उन्होंने अपने लाखों समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था। उन्होंने कहा था, “मैं हिंदू पैदा तो हुआ था लेकिन हिंदू रहकर मरूँगा नहीं।”