राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक विस्तार: शताब्दी वर्ष में शाखाओं का आंकड़ा 1 लाख के पार, विस्तार से जानें…

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इंदौर/जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने शताब्दी वर्ष के दौरान देशव्यापी संगठनात्मक विस्तार और जन-सम्पर्क में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इंदौर में आयोजित हो रही संघ की ‘अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक’ से पूर्व शनिवार को आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने संगठन के विस्तार से जुड़े आधिकारिक आंकड़े मीडिया के समक्ष रखे। इन आंकड़ों के अनुसार, संघ की दैनिक शाखाओं और जन-जागरण अभियानों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।

13 हजार से अधिक नई शाखाएं जुड़ीं, कुल संख्या पहुंची 1,01,151

सुनील आंबेकर ने जानकारी देते हुए बताया कि संगठन के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत बीते एक वर्ष में 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाओं की ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है। इस विस्तार के साथ ही देश भर में नियमित रूप से लगने वाली दैनिक शाखाओं की कुल संख्या बढ़कर अब 1,01,151 हो गई है।

इसके साथ ही संघ की अन्य नियमित गतिविधियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दैनिक शाखाओं के अतिरिक्त साप्ताहिक मिलन और मासिक मंडली की गतिविधियों को मिलाकर देश भर में कुल संगठनात्मक गतिविधियों का समग्र आंकड़ा अब 1,10,849 तक पहुंच चुका है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर युवाओं में संघ के प्रति रुचि और सहभागिता निरंतर बढ़ रही है।

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सामाजिक समरसता के लिए 65,660 हिंदू सम्मेलनों का विशाल आयोजन

शताब्दी वर्ष के अवसर पर केवल शाखाओं के विस्तार तक ही ध्यान केंद्रित नहीं किया गया, बल्कि व्यापक जन-जागरण और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से देशव्यापी अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत देश के ग्रामीण और शहरी दोनों अंचलों में कुल 65,660 हिंदू सम्मेलनों का विशाल स्तर पर आयोजन किया गया।

इन सम्मेलनों के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग, वंचित बस्तियों और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक संघ की पहुंच, संवाद और सहभागिता का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। इन सम्मेलनों ने समाज में आपसी सौहार्द, समरसता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बैठक से पूर्व रखी गई संगठनात्मक प्रगति

यह संगठनात्मक रिपोर्ट 2 से 4 नवंबर 2026 तक इंदौर में होने वाली संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक से पूर्व रखी गई है। शताब्दी वर्ष के पड़ाव पर 1 लाख से अधिक दैनिक शाखाओं का यह आंकड़ा संघ की कार्यप्रणाली, अनुशासन और समाजव्यापी स्वीकार्यता के निरंतर सुदृढ़ होने का प्रमाण प्रस्तुत करता है।

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