जोधपुर। “राजस्थान की जिस चिलचिलाती धूप को सदियों तक हमारी सबसे बड़ी चुनौती माना जाता था, आज उसी तेज धूप से जोधपुर के भड़ला (Bhadla Solar Park) में हजारों मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। अपनी सबसे बड़ी चुनौती को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल देना ही हम राजस्थानियों की असली पहचान है और रेगिस्तान में फूल खिलाने का यह हुनर हमें बहुत अच्छे से आता है।” यह प्रेरक बात पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जोधपुर के हैप्पी आवर्स स्कूल द्वारा आयोजित ‘HHSMUN 2026’ (हैप्पी आवर्स स्कूल मॉडल यूनाइटेड नेशंस) कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुईं पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने युवा छात्र प्रतिनिधियों (डेलीगेट्स) से संवाद करते हुए नेतृत्व, नीति-निर्माण, लोकतंत्र में असहमति के महत्व और सामूहिक प्रयासों की ताकत पर विस्तार से चर्चा की।

छोटे-छोटे प्रयासों से होते हैं बड़े और ऐतिहासिक बदलाव
छात्रों को टीम वर्क और छोटे प्रयासों का महत्व समझाने के लिए राजे ने मधुमक्खी का एक बेहद दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “एक मधुमक्खी अपने पूरे जीवनकाल में केवल एक चम्मच के बारहवें हिस्से (1/12) जितना ही शहद बना पाती है। व्यक्तिगत रूप से उसका यह योगदान बहुत छोटा लगता है, लेकिन जब हजारों मधुमक्खियां एक साथ मिलती हैं, तो वे असंख्य छेदों वाला एक ऐसा जटिल छत्ता बनाती हैं, जिसकी संरचना और गणितीय प्रमाण को समझने में वैज्ञानिकों को दो हजार वर्ष लग गए।” उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि समाज और राष्ट्र निर्माण में भी ऐसे ही छोटे-छोटे सामूहिक प्रयास बहुत बड़ा काम कर देते हैं। आसमान हमारी सीमाओं का अंत नहीं है।
सच्ची नीति वह है, जो लोगों को आत्मनिर्भर बनाए
अपने मुख्यमंत्रित्व काल के अनुभवों को साझा करते हुए वसुंधरा राजे ने सुशासन (Good Governance) का अर्थ समझाया। उन्होंने कहा, “मैंने एक मुख्यमंत्री के रूप में यही सीखा है कि अच्छी नीति वह नहीं होती जो सिर्फ लोगों की मदद करे, बल्कि सच्ची और अच्छी नीति वह है जो लोगों को अपने पैरों पर खड़ा कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाए।” उन्होंने अपनी सरकार के दौरान लाई गई महत्वपूर्ण योजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा:
- बालिका शिक्षा: हमने बेटियों को मुफ्त साइकिलें इसलिए दीं, ताकि स्कूल की लंबी दूरी उनकी शिक्षा के रास्ते में कभी बाधा न बने।
- जल स्वावलंबन: ‘मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान’ के माध्यम से हमने गांवों को अपने पारंपरिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने और जल संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया।
- महिला सशक्तिकरण: ‘भामाशाह योजना’ के माध्यम से महिलाओं को उनके परिवार की मुखिया बनाया गया। उनके नाम से सीधे बैंक खाते खुलवाए गए, ताकि सरकारी योजनाओं का वित्तीय लाभ बिना किसी भ्रष्टाचार के सीधे उनके हाथों में पहुंच सके।
लोकतंत्र में असहमति (Dissent) और संवाद का महत्व

मॉक यूनाइटेड नेशंस (MUN) में हिस्सा ले रहे युवाओं को स्वस्थ बहस के गुर सिखाते हुए उन्होंने लोकतंत्र में असहमति की भूमिका पर जोर दिया। राजे ने कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान यह है कि किसी भी मुद्दे पर अलग-अलग विचार रखे जाएं और तथ्यों (Facts) के आधार पर अपनी बात मजबूती से रखी जाए। उन्होंने छात्रों को समझाया कि किसी भी बहस (Debate) का उद्देश्य केवल अपनी बात मनवाना या दूसरे को हराना नहीं होना चाहिए, बल्कि दूसरे के विचारों को गहराई से समझना और मिलकर एक बेहतर समाधान तलाशना होना चाहिए। इस HHSMUN 2026 कार्यक्रम में ‘मतदाता की आयु’ (Voting Age) और ‘जलवायु परिवर्तन’ (Climate Change) जैसे गंभीर वैश्विक मुद्दों पर छात्र प्रतिनिधियों के बीच शानदार डिबेट हुई।
राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए
अपने संबोधन के अंत में वसुंधरा राजे ने युवाओं की क्षमता पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि आज के ये युवा प्रतिनिधि ही कल देश की नीतियों, नेतृत्व और भविष्य को नई दिशा देंगे। उन्होंने युवाओं को मंत्र दिया कि उनके ‘विचारों में तर्क हो, संवाद में मर्यादा हो और संकल्प में हमेशा राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए।’
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