जयपुर के धानक्या में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने एकात्म मानवदर्शन, ग्राम विकास, AI और पूंजीवाद पर रखे विचार

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Dattatreya Hosabale, RSS Sarkaryavah

जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का ‘एकात्म मानवदर्शन’ केवल भारत, भारतीय जनसंघ या संघ के कार्यकर्ताओं के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए एक वैश्विक मॉडल है। उन्होंने कहा कि दीनदयाल जी ने भारत को उसके अपने मूल स्वरूप यानी ‘भारत’ बनाने की जीवन दृष्टि दी थी, न कि उसे अमेरिका, इंग्लैंड या जापान बनाने की। शुक्रवार को जयपुर के धानक्या स्थित स्मारक पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक भव्य समारोह को संबोधित करते हुए होसबाले ने ये विचार व्यक्त किए। इस कार्यक्रम का आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति द्वारा किया गया था।

पूंजीवाद और साम्यवाद की कमियों का सटीक विकल्प

एकात्म मानवदर्शन की प्रासंगिकता पर गहराई से चर्चा करते हुए होसबाले ने कहा कि दुनिया को केवल पूंजीवाद और साम्यवाद के दो ध्रुवों में नहीं बांटा जा सकता। पूंजीवाद में स्वतंत्रता पर अत्यधिक जोर देने से असमानता और शोषण बढ़ा, जबकि साम्यवाद में समानता के नाम पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता ही समाप्त हो गई। इन दोनों व्यवस्थाओं में मानवीय बंधुता और आपसी संबंधों की घोर उपेक्षा हुई। इसके विपरीत, भारतीय चिंतन व्यक्ति, समाज, सृष्टि और परमेश्वर के बीच के संबंधों को आधार मानकर चलता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान श्रीकृष्ण ने उपनिषदों के सार को गीता के रूप में मानवता को सौंपा, उसी प्रकार दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय संस्कृति के सार को ‘एकात्म मानवदर्शन’ के रूप में आधुनिक युग के लिए प्रस्तुत किया।

विचारों को जमीन पर उतारने और ग्राम विकास की आवश्यकता

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होसबाले ने स्पष्ट किया कि इन महान विचारों को केवल पुस्तकों और अकादमिक शोध तक सीमित रखने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इन्हें सामाजिक जीवन में उतारना होगा। ग्रामीण विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यदि गांवों में पढ़ाई, कमाई और दवाई की समुचित व्यवस्था हो जाए, तो लोग शहरों की ओर पलायन नहीं करेंगे। उन्होंने नानाजी देशमुख द्वारा चित्रकूट और गोंडा में किए गए ग्राम विकास के सफल प्रयोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि, कुटीर उद्योग और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यह कार्य केवल सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, इसके लिए समाज को भी जागृत होकर सामूहिक प्रयास करने होंगे।

तकनीक इंसान की गुलाम हो, इंसान तकनीक का नहीं

आधुनिक दौर की चुनौतियों पर बात करते हुए सरकार्यवाह होसबाले ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय तकनीक या ज्ञान-विज्ञान के विरोधी नहीं थे, लेकिन उनका स्पष्ट मानना था कि तकनीक पर्यावरण के अनुकूल होनी चाहिए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहित अन्य तकनीकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक ऐसी होनी चाहिए जो मनुष्य को सुख दे, आर्थिक रूप से कमजोर न करे और रोजगार के अवसर समाप्त न करे। विदेश से आने वाले ज्ञान को स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए, लेकिन उसे अपने देश की परिस्थितियों के अनुकूल (स्वदेशानुकूल) ढालना आवश्यक है।

शोधार्थियों और पद्मश्री से सम्मानित लोक कलाकारों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम के दौरान होसबाले ने दीनदयाल जी के जीवन से जुड़ा एक प्रेरक प्रसंग भी साझा किया, जिसमें उन्होंने रेडियो का लाइसेंस खत्म होने पर उसका उपयोग करना बंद कर दिया था, जो उनके उच्च नागरिक कर्तव्यों को दर्शाता है।

समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध उद्यमी मनीष गुप्ता ने की और जेईसीआरसी (JECRC) विश्वविद्यालय के अध्यक्ष ओपी अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर शोध करने वाले देश भर के विद्वानों— डॉ. सोहन सिंह (रांची विश्वविद्यालय), डॉ. जगदीश सिंह चंदेल (हिमाचल केंद्रीय विश्वविद्यालय), डॉ. अंशुमान कौशिक (मथुरा) और डॉ. नागेश चौबे (बीएचयू) को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही लोक कला व संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए आलोकवादक पद्मश्री तगाराम भील और भपंग वादक पद्मश्री गफरुद्दीन मेवाती का भी विशेष सम्मान किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत में समारोह समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर मोहनलाल छीपा ने समिति की गतिविधियों की जानकारी दी और सचिव प्रताप भानु शेखावत ने भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन गजेंद्र ज्ञानपुरिया ने किया तथा उपाध्यक्ष नीरज कुमावत ने आभार व्यक्त किया।

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