राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत अपने राजस्थान प्रवास के दौरान शनिवार को राजसमंद जिले में स्थित ऐतिहासिक श्री चारभुजानाथ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने पूरी आस्था और वैदिक परंपराओं के साथ भगवान चारभुजानाथ के दर्शन किए। मंदिर परिसर में पहुंचने पर स्थानीय पुजारियों और गणमान्य नागरिकों ने उनका स्वागत किया।
देश की सुख-समृद्धि और शांति की प्रार्थना
दर्शन के पश्चात संघ प्रमुख ने भगवान के समक्ष विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्र की निरंतर प्रगति, आंतरिक शांति तथा पूरे समाज की सुख-समृद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उनके इस आध्यात्मिक प्रवास को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह देखा गया।
संस्कारों के निर्माण में मंदिरों की अहम भूमिका
इस अवसर पर इस विचार को प्रमुखता से रेखांकित किया गया कि ‘मन्दिर समाज के संस्कार केन्द्र’ हैं। संघ प्रमुख की इस यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भारतीय संस्कृति में देवालय केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज में सकारात्मक ऊर्जा, संस्कार, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों का संचार करने वाले सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र माने जाते हैं।
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