ऋषि गालव भाग की ओर से आयोजित ‘नाद गोविंदम् 3.0’ के तहत घोष पथ संचलन शहर के प्रमुख मार्गों पांचबत्ती और अजमेरी द्वार से होता हुआ रामनिवास बाग स्थित ऐतिहासिक केंद्रीय संग्रहालय (अल्बर्ट हॉल) पहुंचा। यहां आयोजित स्थिर वादन कार्यक्रम में 101 प्रशिक्षित घोषवादकों ने 24 विभिन्न रचनाओं की शानदार और मनमोहक प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और संघ के अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख अनिल ओक ने संगीत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि घोष की स्वरलहरियां स्वयंसेवकों में एकाग्रता का संचार करती हैं। उन्होंने एक बेहद अहम जानकारी देते हुए बताया कि संघ के घोष विभाग द्वारा तैयार की गई उत्कृष्ट स्वदेशी रचनाओं का उपयोग आज भारतीय सेना भी गर्व के साथ कर रही है। उन्होंने गीता के मूल संदेश और वीर सावरकर के त्याग का उदाहरण देते हुए समाज में कर्तव्यबोध और राष्ट्र के प्रति सर्वस्व समर्पण की भावना जगाने पर जोर दिया।
समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए प्रसिद्ध गायक, संगीत रचनाकार और मोहन वीणा वादक पंडित आलोक भट्ट ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने संगीत को व्यक्ति निर्माण और अनुशासन का एक बेहद प्रभावी माध्यम बताया। वक्ताओं ने यह भी संदेश दिया कि भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी और शंख दोनों ही समाज के लिए प्रेरणा के बड़े प्रतीक हैं, जो हमें धर्म और कर्तव्य का मार्ग दिखाते हैं।
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