राजस्थान में आगामी नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को चुनावी प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग को राजनीतिक आरक्षण से संबंधित अपनी रिपोर्ट 5 अगस्त 2026 से पहले प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद वार्डों के आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया भी जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
15 नवंबर तक पूरी करनी होगी चुनावी प्रक्रिया
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने राज्य में नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर 2026 तक हर हाल में पूरी करने की समय सीमा तय की है। कोर्ट ने संकेत दिया कि चुनाव प्रक्रिया में अब किसी तरह की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
अदालत ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव की तैयारियों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद अब चुनावी प्रक्रिया को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों और निर्वाचन आयोग पर होगी।
OBC आयोग को 5 अगस्त तक रिपोर्ट देने के निर्देश
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राजनीतिक आरक्षण के लिए गठित राज्य OBC आयोग को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। आयोग को 5 अगस्त 2026 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बात कही गई है।
हाईकोर्ट ने आयोग की रिपोर्ट में हुई देरी पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि रिपोर्ट तय समय सीमा के भीतर प्रस्तुत की जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आरक्षण से जुड़े कार्यों में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।
रिपोर्ट के बाद एक सप्ताह में आरक्षण की लॉटरी
OBC आयोग की रिपोर्ट आने के बाद नगर निकायों और पंचायतों के वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया के लिए करीब 7 से 8 दिन का समय पर्याप्त है।
इस निर्देश के बाद राज्य सरकार के स्वायत्त शासन विभाग और पंचायती राज विभाग को आरक्षण की प्रक्रिया जल्द पूरी करनी होगी। इससे चुनाव की तैयारियों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा।
15 अगस्त तक चुनाव की अधिसूचना जारी करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को नगर निकायों और पंचायत चुनावों की अधिसूचना 15 अगस्त 2026 को या उससे पहले जारी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत का यह आदेश चुनावी प्रक्रिया को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि OBC आयोग की रिपोर्ट में देरी होने की स्थिति में भी चुनावी प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जा सकता। रिपोर्ट और आरक्षण प्रक्रिया को लेकर समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ने पर जोर दिया गया है।
अगस्त में चुनाव की घोषणा, सितंबर से प्रक्रिया शुरू होने का प्रस्ताव
अदालत में सरकार की ओर से प्रस्तुत संभावित चुनावी कार्यक्रम के अनुसार, अगस्त में चुनाव की घोषणा होने की संभावना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया सितंबर तक पूरी करने की योजना बताई गई है।
इसके बाद ग्रामीण निकायों यानी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। उपलब्ध प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार ग्रामीण निकायों की चुनावी प्रक्रिया सितंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हो सकती है।
पहले नगर निकाय, फिर पंचायत चुनाव
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार नगर निकायों की चुनावी प्रक्रिया पहले पूरी की जाएगी। इसके बाद पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराए जाएंगे। अदालत में पेश किए गए कार्यक्रम के मुताबिक नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया करीब 35 दिनों में पूरी करने का प्रस्ताव है।
इसके बाद ग्रामीण निकायों की चुनावी प्रक्रिया शुरू होगी, जिसे निर्धारित अवधि के भीतर पूरा किया जाना है। इस तरह राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की तैयारी की जा रही है।
चुनाव में देरी को लेकर निर्वाचन आयुक्त ने भी रखी बात
सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने चुनाव में देरी को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वार्डों और पदों के आरक्षण की लॉटरी निकालना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, न कि राज्य निर्वाचन आयोग की।
उनके अनुसार, आरक्षण की प्रक्रिया पूरी हुए बिना राज्य निर्वाचन आयोग के लिए चुनाव की घोषणा करना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर स्थिति स्पष्ट होने में काफी समय लगा, जिसके कारण चुनाव प्रक्रिया में देरी हुई।
अब सरकार और आयोग के सामने समयबद्ध तरीके से काम करने की चुनौती
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद अब राज्य सरकार, OBC आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग के सामने निर्धारित समय सीमा में चुनावी प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती है। सबसे पहले OBC आयोग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद आरक्षण की लॉटरी और अन्य चुनावी तैयारियां पूरी करनी होंगी।
अदालत की ओर से तय समय सीमा के अनुसार, 5 अगस्त तक OBC रिपोर्ट, उसके बाद आरक्षण प्रक्रिया और 15 अगस्त तक चुनाव की अधिसूचना जारी करने की दिशा में काम करना होगा। वहीं, पूरी चुनावी प्रक्रिया को 15 नवंबर 2026 तक समाप्त करना होगा।
राजस्थान की राजनीति में बढ़ेगी चुनावी हलचल
हाईकोर्ट के आदेश के बाद राजस्थान में नगर निकाय और पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की तैयारियां भी तेज हो सकती हैं।
वार्ड आरक्षण की लॉटरी के बाद चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों की तस्वीर काफी हद तक साफ होगी। इसके बाद राजनीतिक दल स्थानीय स्तर पर प्रत्याशियों के चयन और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
कुल मिलाकर, हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। अब सभी की नजर OBC आयोग की रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली आरक्षण प्रक्रिया पर रहेगी।