जयपुर। आधुनिक न्याय व्यवस्था की चुनौतियों के बीच भारतीय विधिशास्त्र के मूल सिद्धांत आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं। यह विचार केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (जयपुर) के धर्मशास्त्र और भारतीय विधिशास्त्र विद्याशाखा के विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्णा शर्मा ने व्यक्त किए। वे मंगलवार को अधिवक्ता परिषद राजस्थान (जयपुर प्रांत) की उच्च न्यायालय इकाई द्वारा आईआर लाइब्रेरी में आयोजित स्टडी सर्किल में “आधुनिक परिप्रेक्ष्य में भारतीय विधि शास्त्र की प्रासंगिकता” विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।

पाश्चात्य अधिकारों की बजाय कर्तव्यों पर है जोर
प्रो. शर्मा ने कहा कि पाश्चात्य विधि व्यवस्था जहां अधिकार (राइट्स) पर केंद्रित है, वहीं भारतीय विधिशास्त्र में कर्तव्य (धर्म) को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि व्यक्ति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करे, तो अधिकारों की रक्षा स्वतः सुनिश्चित हो जाती है। भारतीय न्याय परंपरा केवल अपराध और दंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धर्म, कर्तव्य, सामाजिक उत्तरदायित्व और प्राकृतिक न्याय पर आधारित एक समग्र जीवन-दृष्टि प्रस्तुत करती है।
प्राचीन पंचायत परंपरा का ही आधुनिक रूप है ‘एडीआर’
वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) प्रणाली को भारतीय ग्राम पंचायतों की प्राचीन न्याय परंपरा का आधुनिक स्वरूप बताते हुए शर्मा ने कहा कि मध्यस्थता और समझौते जैसे तंत्र भारतीय प्राकृतिक न्याय से ही प्रेरित हैं। इस दौरान उन्होंने पारिवारिक विधान, हिंदू उत्तराधिकार, विवाह संबंधी विधिक विसंगतियों, फौजदारी प्रक्रिया में साक्ष्य की अवधारणा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सिद्धांतों का भी संक्षिप्त उल्लेख किया। उनका मत था कि इन भारतीय सिद्धांतों को व्यवहार में अपनाने से न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम होगा और पीड़ित पक्ष को समयबद्ध न्याय मिल सकेगा।
‘लोकमंथन’ की बौद्धिक श्रृंखला का हिस्सा है यह आयोजन
यह कार्यक्रम दिसंबर में जयपुर में प्रस्तावित राष्ट्रीय आयोजन ‘लोकमंथन – भारत के लोग’ की बौद्धिक श्रृंखला के तहत आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य विधि क्षेत्र के पेशेवरों के बीच भारतीय न्याय-दृष्टि पर गंभीर संवाद स्थापित करना है। कार्यक्रम की शुरुआत स्टडी सर्किल के संयोजक वैभव पारीक ने प्रो. कृष्णा शर्मा का स्वागत करके की। समापन पर अधिवक्ता दीक्षा मिश्रा और नेहा गोयल ने उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया। इस दौरान अधिवक्ता परिषद के प्रांत महामंत्री अभिषेक सिंह, प्रांत अध्यक्ष प्यारे लाल और राष्ट्रीय मंत्री कमल परसावल सहित अनेक अधिवक्ता उपस्थित रहे। मंच संचालन इकाई महामंत्री धर्मेंद्र बराला ने किया और धन्यवाद ज्ञापन इकाई अध्यक्ष धर्मेंद्र जैन ने किया।
अगला स्टडी सर्किल सेशन कोर्ट परिसर में होगा
अधिवक्ता परिषद की ओर से बताया गया कि इस विषय-श्रृंखला की अगली कड़ी अगले सप्ताह सेशन न्यायालय परिसर में आयोजित की जाएगी। आगामी स्टडी सर्किल में प्रो. कृष्णा शर्मा भारतीय फौजदारी विधान की विशेषताओं और धर्मशास्त्र के आधुनिक न्यायिक उपयोग जैसे गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।