जयपुर: राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। राज्य सरकार द्वारा मार्च 2026 में लाये गए ‘राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2026’ के अनुपालन में आयोग ने दशकों पुराने एक नियम को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
क्या था पुराना नियम और क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 2 जून 1999 को एक आदेश जारी किया गया था। इसके तहत नगरपालिका चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह अनिवार्य किया गया था कि वे नामांकन के समय अपनी संतानों से संबंधित घोषणा या अंडरटेकिंग (Declaration/Undertaking) प्रस्तुत करेंगे। निर्वाचन के बाद यदि किसी निर्वाचित सदस्य की संतानों की संख्या में वृद्धि होती थी, तो उसकी अयोग्यता की जांच के लिए यह घोषणा एक अहम आधार बनती थी।
संशोधन अधिनियम 2026 के बाद क्या बदला?
राज्य सरकार ने राजस्थान राजपत्र में अधिसूचना जारी कर ‘राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009’ की धारा 2 और धारा 24 में संशोधन किया है। इसके तहत नगरीय निकायों के चुनाव से जुड़े संतान संबंधी प्रावधानों को आधिकारिक रूप से हटा दिया गया है। इसी कानूनी बदलाव को ध्यान में रखते हुए, मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव राजेश वर्मा ने 21 जुलाई 2026 को आदेश जारी कर वर्ष 1999 के उस पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है।
अब चुनाव लड़ने वालों को मिलेगी राहत
चूंकि राज्य सरकार ने अधिनियम से संतान संबंधी प्रावधानों को हटा दिया है, इसलिए अब आगामी नगरपालिका निर्वाचनों में अभ्यर्थियों को संतान संबंधी कोई भी घोषणा या अंडरटेकिंग रिटर्निंग अधिकारी को देने की आवश्यकता नहीं होगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के समस्त जिला निर्वाचन अधिकारियों (कलक्टरों) को इस नए आदेश की प्रति भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए हैं।