समाज में जब भी दान और परोपकार की बात आएगी, तो बीकानेर (जयमलसर) के लाल और कलकत्ता प्रवासी सेठ पूनमचंद राठी का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। जयपुर के भव्य बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित 30वें राज्य स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह में राजस्थान सरकार ने उन्हें उनकी अद्वितीय उदारता के लिए सर्वप्रथम सर्वोच्च ‘शिक्षा भूषण अवार्ड’ से नवाजा है।
अकेले दिया ₹108 करोड़ का महादान!
जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेशभर के दानदाताओं ने शिक्षा के लिए कुल ₹318 करोड़ का सहयोग दिया है, जिसमें से अकेले सेठ पूनमचंद राठी ने ₹108 करोड़ की विशाल भूमि और भवन दान कर एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। इस भूमि पर जयमलसर में देश की बेटियों को सेना में नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाने हेतु “बालिका सैनिक स्कूल” का निर्माण कर इसे चालू कर दिया गया है।
उप मुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जब उन्हें और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती श्यामा देवी राठी को शॉल और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया, तो पूरा हॉल सम्मान में खड़ा हो गया। इस ऐतिहासिक पल पर उनकी बेटी सविता और दामाद अमिताभ मूंधड़ा (मुंबई) ने भी पलक पांवड़े बिछाकर उनका स्वागत किया।
सेवा ही है सच्चा संकल्प:
गीताप्रेस गोरखपुर व गीता भवन ऋषिकेश के प्रमुख ट्रस्टी सेठ पूनमचंद राठी का मानना है कि सच्ची सेवा वही है जो दिखावे से दूर, सीधे जरूरतमंद इंसान तक पहुंचे। शिक्षा के अलावा वे गौशालाओं में बेसहारा गायों की देखभाल, मूक पक्षियों के दाने-पानी और गरीबों के भोजन की व्यवस्था में भी हमेशा अपना खजाना खुला रखते हैं। मरुधरा के इस सांचे ‘भामाशाह’ को पूरे देश का सलाम!