जयपुर। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की वर्ष 2023 बैच की तेजतर्रार महिला अधिकारी अदिति वार्ष्णेय अब आधिकारिक रूप से राजस्थान ब्यूरोक्रेसी का हिस्सा बन चुकी हैं। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) से हरी झंडी मिलने के बाद राजस्थान के कार्मिक विभाग ने उनके अंतर-कैडर स्थानांतरण (Inter-Cadre Transfer) का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।
यह प्रशासनिक फेरबदल पूरी तरह वैवाहिक आधार पर किया गया है। इसका आधिकारिक शीर्षक “Inter cadre transfer of Ms. Aditi Varshney, IAS (GJ:2023) to Rajasthan cadre on grounds of marriage to Sh. Madhav Bharadwaj, IAS” रखा गया है। इस आदेश के जारी होने के बाद गुजरात और राजस्थान दोनों राज्यों के कार्मिक विभागों ने कार्यमुक्ति और नए पदभार ग्रहण करने की कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं।
आईएएस माधव भारद्वाज से विवाह बना कैडर बदलने का आधार
आईएएस अदिति वार्ष्णेय के गुजरात से राजस्थान आने के पीछे उनका पारिवारिक और वैवाहिक कारण सबसे प्रमुख रहा है। अदिति का विवाह राजस्थान कैडर के ही होनहार युवा आईएएस अधिकारी माधव भारद्वाज के साथ संपन्न हुआ है। अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए दो अलग-अलग राज्यों (गुजरात और राजस्थान) में रहकर अपनी सेवाएं देना और एक स्वस्थ पारिवारिक संतुलन बनाए रखना एक बड़ी व्यावहारिक चुनौती साबित हो रहा था।
इसी मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सेवा नियमों के विशेष प्रावधानों के तहत अदिति वार्ष्णेय को उनके पति के कार्यक्षेत्र (राजस्थान) में समायोजित करने का मार्ग प्रशस्त किया। दोनों अधिकारियों ने फरवरी 2026 में किसी भी तरह की शाही तड़क-भड़क को छोड़कर, अलवर के मिनी सचिवालय में बेहद सादगी के साथ केवल कुछ पारिवारिक सदस्यों की मौजूदगी में कोर्ट मैरिज की थी, जिसकी देशभर में काफी सराहना हुई थी।
पहले प्रयास में सफलता से लेकर बिना कोचिंग की पढ़ाई: जानिए अदिति से जुड़ी खास बातें
- पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 57वीं रैंक: उत्तर प्रदेश के बरेली में जन्मी और पली-बढ़ी अदिति ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को साल 2022 में अपने पहले ही प्रयास में क्रैक कर लिया। उन्होंने पूरे देश में 57वीं रैंक हासिल की।
- महज 23 साल की उम्र में बनीं अफसर: अदिति देश के सबसे युवा प्रशासनिक अधिकारियों में से एक हैं। उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर बेहद कम उम्र में अपनी मां इंदु वार्ष्णेय (एक गृहिणी) का आईएएस बनने का अधूरा सपना हकीकत में बदल दिया।
- सामान्य अध्ययन (GS) के लिए नहीं ली कोई कोचिंग: जहाँ देश भर से लाखों छात्र कोचिंग के लिए दिल्ली भागते हैं, वहीं अदिति ने सामान्य अध्ययन के लिए पूरी तरह सेल्फ-स्टडी (खुद पढ़ाई) का रास्ता चुना। उन्होंने स्टैंडर्ड बुक्स, एनसीईआरटी (NCERT) और रोज़ाना अखबार पढ़कर आधार मजबूत किया।
- बीच में छोड़ी मास्टर्स की पढ़ाई: दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस से बी.ए. ऑनर्स करने के बाद उन्होंने ‘दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स’ (DSE) में पोस्ट ग्रेजुएशन में दाखिला लिया था। लेकिन जब उन्हें लगा कि कॉलेज और यूपीएससी की तैयारी एक साथ संभालना मुश्किल है, तो उन्होंने मास्टर्स की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी।
- समाजशास्त्र बना ‘ट्रम्प कार्ड’: अदिति ने वैकल्पिक विषय (Optional Subject) के रूप में सोशियोलॉजी को चुना था। उन्होंने आंसर राइटिंग में कड़ी मेहनत कर इस विषय में 289 अंक हासिल किए, जिसने उन्हें टॉप-100 रैंक में ला खड़ा किया।
जानिए क्या हैं ‘Inter-Cadre Transfer’ के प्रशासनिक नियम
सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह जानना बेहद दिलचस्प है कि आखिर आईएएस अधिकारियों का कैडर ट्रांसफर किस तरह होता है। यूपीएससी की परीक्षा पास करने के बाद जब किसी उम्मीदवार को एक बार कोई राज्य कैडर आवंटित कर दिया जाता है, तो सामान्य परिस्थितियों में पूरे सेवाकाल के दौरान उसे उसी राज्य में अपनी सेवाएं देनी होती हैं।
परंतु, भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर) नियम 1954 के नियम 5(2) के तहत केंद्र सरकार को यह विशेष शक्ति प्राप्त है कि वह अत्यंत असाधारण और मानवीय परिस्थितियों में किसी अधिकारी के कैडर को दूसरे राज्य में बदल सकती है। इसके केवल दो ही मुख्य आधार होते हैं:
- अखिल भारतीय सेवा के ही किसी अन्य अधिकारी से विवाह होना (जिसका लाभ आईएएस अदिति वार्ष्णेय को मिला है)।
- अत्यधिक गंभीर और असाधारण व्यक्तिगत या चिकित्सीय आधार (Extreme Compassionate Grounds)।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी के साथ-साथ संबंधित दोनों राज्यों (रिलीव करने वाले और ज्वाइन कराने वाले राज्य) की लिखित सहमति होना अनिवार्य शर्त है। राजस्थान कैडर में शामिल होने के बाद माना जा रहा है कि अदिति की कुशल कार्यशैली से राज्य के प्रशासनिक तंत्र को और मजबूती मिलेगी।