जल है तो कल है: बूंदी में कुएं, बावड़ी और तालाबों की साफ-सफाई शुरू

Madhu Manjhi

बूंदी। प्राकृतिक जल स्रोतों को सहेजने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति आमजन को जागरूक करने के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ ने अब बूंदी जिले में जोर पकड़ लिया है। शुक्रवार को शहर की ऐतिहासिक जैतसागर झील के किनारे एक वृहद श्रमदान और स्वच्छता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष ओमप्रकाश भडाणा ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने खुद झाड़ू थामकर श्रमदान किया और बूंदी के प्राकृतिक व नैसर्गिक सौंदर्य को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से साफ-सफाई करने का कड़ा संदेश दिया।

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मिलकर किया श्रमदान

बोर्ड अध्यक्ष के इस प्रयास में प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जैतसागर के किनारे श्रमदान करने वालों में प्रमुख रूप से:

  • जिला कलक्टर हरफूल सिंह यादव
  • जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रवि वर्मा
  • जिलाध्यक्ष रामेश्वर मीणा
  • महामंत्री संजय लाठी
  • ऑयल इंडिया के निदेशक मोतीलाल मीणा
  • पूर्व नगर परिषद सभापति सरोज अग्रवाल
  • पूर्व जिला प्रमुख राकेश बोयत
  • राजकुमार श्रृंगी, उपखंड अधिकारी लक्ष्मीकांत मीणा, नगर परिषद आयुक्त बृजेश राय और तहसीलदार अर्जुन लाल मीणा शामिल रहे।

साइकिल चलाकर दिया स्वास्थ्य और ईंधन बचाने का संदेश

श्रमदान के पश्चात पर्यावरण संरक्षण और उत्तम स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए एक अनोखी पहल की गई। देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश भडाणा और जिला कलक्टर श्री हरफूल सिंह यादव ने जैतसागर झील से लेकर ऐतिहासिक चौथ माता मंदिर तक साइकिल चलाकर सफर तय किया।

साइकिल यात्रा के दौरान उन्होंने आमजन से अपील की कि वे पेट्रोल-डीजल जैसे महंगे और प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों की बचत करें। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी दिनचर्या में साइकिल को शामिल करना चाहिए, जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और व्यक्ति शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रहेगा।

जल स्रोतों को बचाने का सरकार का संकल्प

श्रमदान के दौरान उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए बोर्ड अध्यक्ष भडाणा ने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण को लेकर पूरी तरह से संकल्पित है। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप जल बचत और जल स्रोतों की साफ-सफाई के इस महाभियान से आमजन को अधिकाधिक संख्या में जुड़ना चाहिए। जल है तो कल है, और आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी सहेजना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है।”

उन्होंने बताया कि ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत जिले के पुराने कुएं, बावड़ी, तालाब और अन्य ऐतिहासिक जल स्रोतों की साफ-सफाई युद्ध स्तर पर की जा रही है, ताकि आगामी मानसून के दौरान बारिश की एक-एक बूंद को संरक्षित किया जा सके।

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