जल संकट से उबारने की पहल: जयपुर जिले को जल संरक्षण में अग्रणी बनाने का संकल्प, 5 जून तक चलेगा जन अभियान

Madhu Manjhi

जयपुर। ‘जल है तो कल है, जल है तो जीवन है’—इसी मूल मंत्र को धरातल पर उतारने और जयपुर जिले को जल संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को एक अहम पहल की गई। ‘वंदे गंगा जल संरक्षण, जन अभियान’ के तहत जिला प्रशासन और जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में एक विशाल कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में विधि, संसदीय कार्य एवं जयपुर जिले के प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

जल संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी: प्रभारी मंत्री

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल ने जल को धरती के प्राणिमात्र की मूलभूत आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि आज जिस तेजी से भूजल स्तर गिर रहा है, वह चिंता का विषय है। जल को भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना अब सिर्फ सरकार का काम नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने जिले के सभी उद्यमियों, किसानों, सामाजिक संगठनों, सरकारी कार्मिकों और आम जनता से अपील की कि वे जल संरक्षण के इस पुनीत कार्य में तन, मन और धन से जुड़ें। मंत्री पटेल ने आह्वान किया कि इस अभियान को एक ‘जन आंदोलन’ का रूप दिया जाए, ताकि जयपुर जल संरक्षण के मामले में पूरे प्रदेश में एक मिसाल बन सके। इसके पश्चात उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को जल बचाने की शपथ भी दिलाई।

कलेक्टर की अपील: उद्यमी करें खुले मन से सहयोग

कार्यशाला की अध्यक्षता जयपुर जिला कलेक्टर संदेश नायक ने की। उन्होंने अपने संबोधन में प्राणिमात्र के लिए जल की अपार महत्ता पर प्रकाश डाला। कलेक्टर नायक ने उपस्थित सभी उद्यमियों से आग्रह किया कि वे अपने सीएसआर (CSR) फंड के तहत जल संरक्षण के कार्यों में अधिक से अधिक धनराशि दान करें, ताकि जिले में जल संग्रहण के बड़े प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके।

25 मई से 5 जून तक चलेगा विशेष अभियान

जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र (जयपुर ग्रामीण) के महाप्रबंधक सुभाष शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि ‘वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान’ 25 मई से 5 जून 2026 तक पूरे जोर-शोर से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने सभी उद्यमियों से इस 10 दिवसीय विशेष अभियान में व्यापक और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की। कार्यक्रम की रूपरेखा और इसके उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी जिला उद्योग केंद्र (जयपुर शहर) की महाप्रबंधक डॉ. अनुकृति सिंह ने दी।

विशेषज्ञों और पद्मश्री अवार्डीज ने साझा किए अनुभव

कार्यशाला में जल संरक्षण के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर भी गहन चर्चा हुई:

  • भूजल का संकट: वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक डॉ. मलेंद्र चौहान ने अत्यधिक भूजल दोहन से उत्पन्न हो रहे गंभीर खतरों के बारे में चेतावनी दी।
  • वर्षा जल संचयन: जल ग्रहण विभाग के अधीक्षण अभियंता गोपाल प्रसाद जैन ने बारिश की एक-एक बूंद को सहेजने के वैज्ञानिक तरीकों और उसकी महत्ता पर पावरपॉइंट प्रस्तुति दी।
  • प्रेरक प्रसंग: ‘पानी के जादूगर’ के नाम से मशहूर और पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरणविद् लक्ष्मण सिंह (लापोड़िया) और ‘धरती अमृत’ वाले पद्मश्री सुंडाराम ने भी मंच साझा किया। उन्होंने जल संरक्षण, पौधारोपण और पर्यावरण बचाने को लेकर अपने जमीनी अनुभवों और किए गए सफल कार्यों से सभी को अवगत कराया।

इस अवसर पर उपवन संरक्षक वी. केतन कुमार, अतिरिक्त जिला कलेक्टर (प्रथम) विनीता सिंह, अतिरिक्त जिला कलेक्टर (चतुर्थ) आशीष कुमार सहित प्रशासन के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी, जिले के प्रमुख उद्यमी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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