जयपुर। राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएं (RAS) संयुक्त सीधी भर्ती-2024 के माध्यम से नव नियुक्त होकर आए प्रशिक्षु अधिकारियों को आपदा की कठिन स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयार करने की एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। सोमवार को जयपुर स्थित इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान में इन भावी प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एसडीआरएफ (SDRF) राजस्थान द्वारा एक विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम और आधुनिक रेस्क्यू उपकरण प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य अधिकारियों को अपने सेवाकाल के दौरान किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में त्वरित और सटीक निर्णय लेने में सक्षम बनाना था।
प्रशासनिक समन्वय और एसडीआरएफ की कार्यप्रणाली पर चर्चा
इस विशेष प्रशिक्षण सत्र में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (आरएसी एवं एसडीआरएफ) रूपिन्दर सिंघ ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
- एडीजी का उद्बोधन: एडीजी सिंघ ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए प्रशासनिक सेवाओं में आपदा प्रबंधन के महत्व, समयबद्ध राहत कार्यों और विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय की रणनीतियों पर अपना बहुमूल्य मार्गदर्शन दिया।
- कार्यप्रणाली का प्रस्तुतीकरण: एसडीआरएफ राजस्थान के कमांडेंट श्री राजेंद्र सिंह सिसोदिया ने राज्य में आपदा प्रबंधन की रीढ़ मानी जाने वाली एसडीआरएफ की कार्यप्रणाली, बल की संगठनात्मक संरचना और पूर्व में किए गए जटिल रेस्क्यू ऑपरेशंस (जैसे- बाढ़, भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदाएं) के बारे में विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया।
लाइव डेमो: ‘रोप रेस्क्यू’ से समझाया जीवन बचाने का हुनर
व्यावहारिक प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए संस्थान परिसर में उपस्थित सभी प्रशिक्षुओं के समक्ष एसडीआरएफ की जांबाज रेस्क्यू टीम ने ‘रोप रेस्क्यू’ (Rope Rescue) का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला सजीव प्रदर्शन (Live Demo) किया। जवानों ने अत्याधुनिक ड्रील के माध्यम से यह दिखाया कि किस प्रकार ऊंची इमारतों, गहरी खाइयों या कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में फंसे आपदा पीड़ितों को सुरक्षित और कम से कम समय में रेस्क्यू किया जाता है। इस सजीव प्रदर्शन ने सभी भावी अधिकारियों को फील्ड पर काम करने की वास्तविक चुनौतियों से रूबरू कराया।
हार्ट अटैक से लेकर गैस सिलेंडर की आग तक… आपातकालीन प्रबंधन की सीख
इस जनजागरूकता कार्यक्रम में केवल बड़ी प्राकृतिक आपदाओं ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में अचानक होने वाली आपातकालीन घटनाओं से निपटने का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया:
- चिकित्सकीय आपातकाल: अचानक हार्ट अटैक आने पर मरीज की जान बचाने के लिए सही तरीके से सीपीआर (CPR) देने की प्रक्रिया सिखाई गई।
- घरेलू दुर्घटनाएं: घरों में गैस सिलेंडर में लगने वाली आग को सूझबूझ और बिना घबराए बुझाने के सुरक्षित तरीके बताए गए।
- सड़क दुर्घटना और ‘गोल्डन ऑवर’: भीषण सड़क दुर्घटनाओं के समय घायलों को प्राथमिक उपचार देने के गुर सिखाए गए। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी घटनास्थल पर आधिकारिक रेस्क्यू टीम के पहुंचने से पहले शुरुआती समय (‘गोल्डन ऑवर’) में आम नागरिकों और स्थानीय प्रशासन की मदद से घायलों की जान कैसे बचाई जा सकती है।
अत्याधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन और हेल्पलाइन नंबर
सत्र के अंतिम चरण में प्रशिक्षु अधिकारियों को एसडीआरएफ के बेड़े में शामिल विभिन्न अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय रेस्क्यू उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन कराया गया। तकनीकी विशेषज्ञों ने इन उपकरणों की कार्यक्षमता और अलग-अलग आपदाओं में इनकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से ब्रीफ किया।
कार्यक्रम के समापन पर फील्ड में काम आने वाले महत्वपूर्ण संपर्क सूत्र साझा किए गए। इनमें एसडीआरएफ राजस्थान द्वारा विशेष रूप से संचालित ‘बोरवेल हेल्पलाइन नंबर’, एसडीआरएफ कंट्रोल रूम का नंबर तथा आपदा राहत से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण आपातकालीन नंबरों की विस्तृत सूची नव नियुक्त प्रशासनिक अधिकारियों को नोट करवाई गई।