जालूपुरा थाना पुलिस की बड़ी कार्रवाई: रेंटेड बैंक अकाउंट्स के जरिए करोड़ों का हेरफेर करने वाला प्रमोद कुमावत चढ़ा हत्थे, साथी फरार

Madhu Manjhi

जयपुर: देश और प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए राजस्थान पुलिस मुख्यालय द्वारा चलाए जा रहे विशेष ‘अभियान म्यूल हंटर’ के तहत जयपुर उत्तर जिला पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क के एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से भारी मात्रा में एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, नकदी और नोट गिनने की मशीन बरामद की है। यह गिरोह दूसरों के बैंक खातों को किराए पर लेकर (म्यूल अकाउंट) देश भर में ठगी की रकम को रोटेट और विड्रॉल करने का काम कर रहा था।

करण शर्मा (पुलिस उपायुक्त, जयपुर उत्तर) ने बताया कि यह कार्रवाई बजरंग सिंह (अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, जयपुर उत्तर द्वितीय) के निर्देशन और राजेन्द्र कुमार मीणा (सहायक पुलिस आयुक्त, वृत कोतवाली) व हवासिंह मंगवा (थानाधिकारी, जालूपुरा) के नेतृत्व में गठित विशेष टीम द्वारा की गई है।

टैक्सी कार की तलाशी में खुला राज, नोट गिनने की मशीन बरामद

पुलिस टीम ने जालूपुरा क्षेत्र से आरोपी प्रमोद कुमावत (उम्र 32 वर्ष), निवासी किशनगढ़ रेनवाल (हाल किरायेदार- विनायक विहार डी, रावण गेट, जयपुर) को गिरफ्तार किया है। जब पुलिस ने उसकी टैक्सी कार (नंबर RJ-14 TF-3411) की गहनता से तलाशी ली, तो उसमें से साइबर ठगी का पूरा सेटअप बरामद हुआ।

कार से विभिन्न बैंकों के 38 एटीएम कार्ड, खाली व भरे हुए चेकबुक, एक नोट गिनने की मशीन, कई सिम कार्ड, मोबाइल फोन और साइबर ठगी की 3,86,700 रुपए की नकदी बरामद की गई है।

आधी रात को होटल के कमरा नंबर 2023 में रेड, ऐसे हुआ था खुलासा

इस पूरे मामले का पटाक्षेप 17 अप्रैल 2026 की रात को हुआ था। रात्रि गश्त के दौरान हेड कांस्टेबल धन्नाराम (1187) को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि सिंधी कैंप/जालूपुरा इलाके के ‘होटल केंडी पैलेस’ में कुछ लोग संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त हैं।

पुलिस ने जब होटल के कमरा नंबर 2023 में अचानक छापा मारा, तो वहां कई युवक लाइव साइबर ठगी का रैकेट चलाते हुए रंगे हाथों पाए गए। पुलिस को देखते ही मुख्य आरोपी प्रमोद कुमावत और उसके साथी सूरज व अजय मौके से फरार होने में कामयाब रहे, जबकि उनके एक साथी राजेन्द्र बैरवा को पुलिस ने दबोच लिया था। उस वक्त पुलिस ने मौके से 19 मोबाइल फोन, लैपटॉप और आरोपी की कार को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 106 के तहत जब्त किया था।

तरीका-ए-वारदात: रेंटेड अकाउंट्स का मकड़जाल

जब्त किए गए मोबाइल फोन और गैजेट्स का जब साइबर सेल द्वारा तकनीकी विश्लेषण (डेटा एक्सट्रैक्शन) किया गया, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए:

  • किराए के बैंक खाते: यह गैंग मुख्य रूप से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के सीधे-साधे लोगों को लालच देकर उनके बैंक खाते किराए पर लेती थी।
  • रकम का रोटेशन: देश के किसी भी हिस्से में साइबर ठगी होने के बाद ठगी की राशि को तुरंत इन किराए के खातों (म्यूल अकाउंट्स) में ट्रांसफर किया जाता था।
  • कैश विड्रॉल: पुलिस ट्रैकिंग से बचने के लिए आरोपी इस रकम को लगातार दूसरे खातों में रोटेट करते थे और फिर विभिन्न शहरों के एटीएम से कैश निकालकर फरार हो जाते थे।

केंद्रीय समन्वय (प्रतिबिंब) पोर्टल पर जांच करने पर इन बैंक खातों के खिलाफ देश के कई राज्यों में पहले से ही धोखाधड़ी की दर्जनों शिकायतें दर्ज पाई गईं।

विभिन्न राज्यों में दर्ज हैं मुकदमे, साथियों की तलाश जारी

थाना जालूपुरा में आरोपी प्रमोद कुमावत के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(2) और आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत मुकदमा नंबर 72/2026 दर्ज कर उसे सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य फरार आरोपियों—सूरज शर्मा, अजय और अन्य गुर्गों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम:

इस पूरे नेक्सस को क्रैक करने में थानाधिकारी हवासिंह मंगवा, उपनिरीक्षक राजेन्द्र कुमार शर्मा, हेड कांस्टेबल झाबरमल (1071), अनिल कुमार (2109), कांस्टेबल हरीराम (8524), लक्ष्मीकान्त (9251), जितेन्द्र सिंह (9904), शिवराज (10064), अजय (5386) और साइबर सेल जयपुर उत्तर के कांस्टेबल नन्छूराम (9260) की विशेष और सराहनीय भूमिका रही।

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