राजस्थान के कोटा जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की एक रूह कंपा देने वाली लापरवाही सामने आई है। कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल और जेकेलोन अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी (C-Section) के बाद किडनी संक्रमण फैलने से अब तक चार प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। हालिया घटनाओं में बूंदी निवासी 22 वर्षीय प्रिया महावर और श्रीराम नगर की 26 वर्षीय पिंकी महावर ने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकों की घोर लापरवाही और समय पर सही उपचार न मिलने के कारण इन महिलाओं की जान गई है। प्रिया के पति रोहित ने बताया कि डिलीवरी के महज कुछ घंटों बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उन्हें सही जानकारी देने के बजाय सीधे पुलिस को सूचना दी और शव का पोस्टमार्टम कराने का दबाव बनाया। वहीं पिंकी के मामले में स्थिति और भी भयावह रही, जहाँ नाजुक हालत में उसे एम्बुलेंस तक मुहैया नहीं कराई गई और परिजनों को निजी स्तर पर वेंटिलेटर एम्बुलेंस का इंतजाम करने को कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कोटा के सरकारी अस्पतालों में दहशत का माहौल है और चिकित्सा प्रशासन ने अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए सीजेरियन ऑपरेशनों पर ही अघोषित रोक लगा दी है। रामपुरा सैटेलाइट अस्पताल जैसे सरकारी केंद्रों ने प्रसूताओं को भर्ती करने से हाथ खड़े कर दिए हैं, जिससे गरीब परिवारों को निजी अस्पतालों की ओर भागने पर मजबूर होना पड़ रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि जेकेलोन अस्पताल प्रशासन ने इस मामले में पूरी तरह चुप्पी साध ली है और ओटी (OT) वार्ड का ड्यूटी रजिस्टर तक गायब कर दिया गया है। हालाँकि, अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने लापरवाही से इनकार करते हुए मौत का कारण ‘टैचीकार्डिया’ (हार्ट बीट बढ़ना) बताया है। दूसरी ओर, मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं और प्रथम दृष्टया प्रोटोकॉल की अनदेखी पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
News Update Checklist (Quick Reference)
| विवरण | प्रमुख तथ्य |
| मृतकों की संख्या | 4 प्रसूता (पायल, ज्योति, प्रिया और पिंकी) |
| मौत का प्राथमिक कारण | सिजेरियन के बाद किडनी संक्रमण (Septicemia/Infection) |
| अस्पताल का नाम | जेकेलोन अस्पताल एवं नया मेडिकल कॉलेज अस्पताल, कोटा |
| प्रशासनिक चूक | ड्यूटी रजिस्टर गायब, एम्बुलेंस की अनुपलब्धता, सीजेरियन टाले गए |
| सरकारी कार्रवाई | उच्च स्तरीय जांच के आदेश, दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा |
| अस्पताल का तर्क | कॉम्प्लिकेशंस और टैचीकार्डिया (हार्ट बीट बढ़ना) |