हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: दिव्यांगता जांच के लिए बार-बार नहीं बुला सकते, पुनर्मूल्यांकन के बाद फिर से बुलाना गलत

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राजस्थान में दिव्यांग आरक्षण कोटे के तहत फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ चल रही एसओजी (SOG) जांच के बीच राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि एक बार विभागीय निर्देश पर दिव्यांगता का पुनर्मूल्यांकन हो जाने के बाद किसी भी व्यक्ति को बार-बार जांच के लिए बुलाना उचित नहीं है।

अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी

जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह टिप्पणी कुलदीप चौधरी द्वारा दायर याचिका को निस्तारित करते हुए की। अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPWD)-2016 के तहत सरकार का यह प्राथमिक कर्तव्य है कि वह कानून का दुरुपयोग रोके। लेकिन, यदि किसी व्यक्ति की विकलांगता का आकलन विभाग के निर्देश पर पहले ही किया जा चुका है, तो उसे बार-बार पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया के लिए उपस्थित होने को नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि सरकार को जांच की पूरी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता सुनिश्चित करनी चाहिए।

क्या था याचिकाकर्ता का मामला?

याचिकाकर्ता कुलदीप चौधरी के वकील मिर्जा फैसल बेग ने कोर्ट को बताया कि उनके क्लाइंट को ‘लो विजन’ कैटेगरी के तहत 60% विकलांगता का प्रमाण-पत्र जारी हुआ था। विभागीय मेडिकल बोर्ड ने पूर्व में इसका पुनर्मूल्यांकन कर इसे 40% से अधिक ही माना था। इसके बावजूद, अब एक बार फिर किसी शिकायत के आधार पर एसओजी ने उसे नोटिस जारी कर पुनर्मूल्यांकन के लिए उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर, सरकार ने तर्क दिया कि राज्य को किसी भी अभ्यर्थी द्वारा दावा की गई विकलांगता का दोबारा आकलन करने का पूर्ण अधिकार है और विभागीय अधिकार को किसी भी स्थिति में प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।

कानूनी कार्यवाही और कोर्ट का रुख

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी दिव्यांग व्यक्ति ने RPWD अधिनियम के तहत प्रमाण-पत्र प्राप्त किया है और विभाग के निर्देश पर उसका पुनर्मूल्यांकन भी हो चुका है, तो वह बाद में किसी फर्जीवाड़े की शिकायत पर होने वाली बार-बार की कार्यवाही को चुनौती देने का अधिकार रखता है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला सिविल रिट के तहत दायर किया गया है, इसलिए सिविल रिट में पुलिस की चल रही आपराधिक जांच या कार्रवाई पर रोक लगाना संभव नहीं है। इसी के साथ याचिका को निस्तारित कर दिया गया।

SOG की रडार पर हैं 10 सरकारी भर्तियां

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में एसओजी इस समय 10 अलग-अलग सरकारी भर्तियों में दिव्यांग कोटे का दुरुपयोग कर नौकरी पाने वालों की गहन जांच कर रही है। इस बड़े फर्जीवाड़े में अब तक एसओजी ने 44 अभ्यर्थियों, शिक्षकों और अन्य विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एसओजी हेडक्वार्टर की हेल्पलाइन पर मिली 27 शिकायतों के बाद कई अभ्यर्थियों को पुनर्मूल्यांकन के लिए बुलाया गया था, जिनमें से कई की विकलांगता 40 प्रतिशत से कम पाई गई। इस मामले में एसओजी का अनुसंधान अभी भी निरंतर जारी है।

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