अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (ACC) ने कोलेस्ट्रॉल मैनेजमेंट को लेकर क्रांतिकारी नई गाइडलाइन जारी की है। वर्ल्ड हेल्थ फेडरेशन (WHF) के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में हर साल 2 करोड़ से ज्यादा मौतें कार्डियोवस्कुलर डिजीज (CVD) के कारण होती हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण हाई कोलेस्ट्रॉल है। नई गाइडलाइन ने ‘वन साइज फिट्स ऑल’ के पुराने फॉर्मूले को खत्म कर अब पर्सनलाइज्ड रिस्क (व्यक्तिगत जोखिम) पर ध्यान केंद्रित किया है।
क्या बदल गया? अब ‘नॉर्मल’ की परिभाषा अलग है
पुरानी गाइडलाइन में LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) को 130 mg/dL से कम रखने की सामान्य सलाह दी जाती थी। लेकिन अब इसे तीन श्रेणियों में बांट दिया गया है:
- लो रिस्क (जिन्हें हार्ट डिजीज नहीं है): LDL 100 mg/dL से कम होना चाहिए।
- मीडियम रिस्क: LDL 70 mg/dL से कम रखना अनिवार्य है।
- हाई रिस्क (हार्ट पेशेंट्स के लिए): उनके लिए लक्ष्य अब 55 mg/dL से भी कम रखा गया है।
हार्ट ही नहीं, ब्रेन और किडनी पर भी ‘अटैक’ करता है कोलेस्ट्रॉल
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ा हुआ बैड कोलेस्ट्रॉल केवल हार्ट अटैक ही नहीं लाता, बल्कि शरीर के अन्य अंगों को भी बेकार कर देता है:
- हार्ट: आर्टरीज में प्लाक जमा होने से ऑक्सीजन की कमी (एंजाइना) और हार्ट अटैक का खतरा।
- ब्रेन: ब्लड क्लॉट्स के कारण स्ट्रोक और याददाश्त कम होने जैसी समस्याएं।
- किडनी: छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचने से क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा।
9 साल की उम्र में स्क्रीनिंग जरूरी क्यों?
नई गाइडलाइन में एक चौंकाने वाली सलाह दी गई है—बच्चों की 9 साल की उम्र से ही कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग शुरू कर देनी चाहिए। इसके पीछे जेनेटिक कारण (फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया) और आजकल की खराब लाइफस्टाइल (जंक फूड और कम शारीरिक सक्रियता) है, जो कम उम्र में ही नसों को ब्लॉक करना शुरू कर देती है।
कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के ‘गोल्डन रूल्स’
अगर आपकी जांच में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ आता है, तो केवल दवा ही नहीं, लाइफस्टाइल में बदलाव सबसे पहला कदम होना चाहिए:
- डाइट: अल्ट्रा प्रोसेस्ड और ट्रांस फैट वाले फूड से तौबा करें। फाइबर युक्त भोजन बढ़ाएं।
- एक्टिविटी: रोजाना कम से कम 30 मिनट की ब्रिक्स वॉकिंग या कार्डियो एक्सरसाइज करें।
- आदतें: स्मोकिंग छोड़ें क्योंकि यह गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) को कम करती है। पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करें।
विशेषज्ञों की राय: यदि लाइफस्टाइल बदलाव से सुधार नहीं होता या आप ‘हाई रिस्क’ कैटेगरी में हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर स्टेटिन या अन्य कॉम्बिनेशन थेरेपी तुरंत शुरू करनी चाहिए। याद रखें, हाई कोलेस्ट्रॉल एक ‘साइलेंट किलर’ है जिसके लक्षण तब तक नहीं दिखते जब तक वह गंभीर बीमारी न बन जाए।