सवाई माधोपुर: सरकारी खरीद केंद्रों पर सन्नाटा, मंडी में सरसों के दाम ₹7000 के पार; MSP से दूरी बना रहे किसान

Desk

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में रबी की फसलों (चना और सरसों) की सरकारी खरीद शुरू हुए करीब दो सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन सरकारी केंद्रों पर रौनक गायब है। इसके विपरीत, आलनपुर स्थित कृषि उपज मंडी में किसानों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इसका मुख्य कारण मंडी में मिलने वाले ऊंचे दाम और तुरंत नकद भुगतान की सुविधा है।

मंडी बनाम सरकारी केंद्र: भाव का बड़ा अंतर

किसानों के मंडी की ओर रुख करने की सबसे बड़ी वजह सरसों के भावों में उछाल है। मंडी में इन दिनों सरसों के भाव 7,000 रुपए प्रति क्विंटल के पार पहुंच गए हैं। वहीं, सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) काफी कम है:

  • सरसों (MSP): 6,200 रुपए प्रति क्विंटल
  • चना (MSP): 5,875 रुपए प्रति क्विंटल

मंडी में सरसों बेचने पर किसानों को सरकारी भाव की तुलना में सीधे तौर पर 800 रुपए प्रति क्विंटल तक का अधिक लाभ मिल रहा है।

शादियों का सीजन और नकद की जरूरत

ग्रामीण इलाकों में इन दिनों शादियों का दौर चल रहा है और आगामी आखातीज (अक्षय तृतीया) का बड़ा सावा है। किसानों को घरेलू और मांगलिक कार्यों के लिए तुरंत नकदी की आवश्यकता है। सरकारी खरीद केंद्रों पर भुगतान की प्रक्रिया लंबी और धीमी है, जबकि मंडी में उपज बेचते ही किसानों को हाथो-हाथ नकद भुगतान मिल जाता है। यही कारण है कि किसान राजफैड के केंद्रों के बजाय व्यापारियों को फसल बेचना पसंद कर रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों में सुस्ती

सहकारी क्रय-विक्रय संघ लिमिटेड (राजफैड) ने 25 मार्च से इलेक्ट्रॉनिक कांटों के जरिए जिले में नौ केंद्रों पर खरीद शुरू की थी। इन केंद्रों में चकचैनपुरा, चौथ का बरवाड़ा, खण्डार, बामनवास, बौली, भाड़ौती, गंगापुर सिटी, बहरावण्डा कलां और बालेर शामिल हैं।

हैरानी की बात यह है कि बीते 14 दिनों में इन 9 केंद्रों पर केवल 400 किसानों ने पंजीकरण कराया है और महज 400 क्विंटल के करीब ही आवक हुई है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि बेहतर भाव और नकद भुगतान के सामने सरकारी एमएसपी का आकर्षण फीका पड़ गया है।

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