गहलोत का ‘इंतज़ारशास्त्र’ चैप्टर-12: कांस्टीट्यूशन क्लब पर उठाए 3 तीखे सवाल; पूछा- भजनलाल सरकार को किसका डर?

Desk

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सोशल मीडिया सीरीज ‘इंतज़ारशास्त्र’ का कारवां शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 को अपने 12वें पड़ाव पर पहुँच गया है। इस बार गहलोत ने जयपुर स्थित अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ़ राजस्थान’ की स्थिति को मुद्दा बनाते हुए भजनलाल सरकार की नियत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

गहलोत ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार की ‘बदला लेने की राजनीति’ के कारण प्रदेश के बुद्धिजीवियों, लेखकों और जनप्रतिनिधियों के लिए बना यह विश्वस्तरीय मंच आज सरकारी उपेक्षा का शिकार है।

दिल्ली की तर्ज पर बना था ‘कांस्टीट्यूशन क्लब’

जयपुर के केंद्र में स्थित इस क्लब को दिल्ली के ‘कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया’ की तर्ज पर बनाया गया था। गहलोत ने अपनी पोस्ट में याद दिलाया कि इस क्लब में आधुनिक ऑडिटोरियम, मीटिंग हॉल, कॉफी शॉप, लग्जरी जिम, रेस्टोरेंट और वीआईपी गेस्ट रूम जैसी फाइव स्टार सुविधाएं मौजूद हैं। इसका मुख्य उद्देश्य लोकतांत्रिक संवाद के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराना था।

भजनलाल सरकार से पूछे ये 3 तीखे सवाल

अशोक गहलोत ने सरकार को घेरते हुए सीधे तौर पर तीन सवाल पूछे हैं:

  1. देरी का कारण: निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न होने के बावजूद इसे लगभग एक साल तक बंद क्यों रखा गया?
  2. पारदर्शिता का अभाव: अब जब इसे खोला गया है, तो इसकी सदस्यता (Membership) की प्रक्रिया को पारदर्शी और सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?
  3. लोकतंत्र से डर: क्या भाजपा सरकार को डर है कि इस क्लब में होने वाले लोकतांत्रिक संवाद और चर्चाओं से उनकी कमियां उजागर होंगी?

जनता के पैसे की बर्बादी का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने तीखे लहजे में कहा कि यह क्लब किसी पार्टी की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता के खून-पसीने की कमाई से बना है। उन्होंने चेतावनी दी कि केवल इसलिए इसे उपेक्षित रखना कि इसका निर्माण पिछली कांग्रेस सरकार के समय हुआ था, राजस्थान की जनता और उसके संसाधनों के साथ अन्याय है।

बौद्धिक विरासत पर प्रहार

गहलोत का तर्क है कि ‘कांस्टीट्यूशन क्लब’ केवल एक ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि राजस्थान की बौद्धिक विरासत का हिस्सा है। इसे सीमित लोगों तक सीमित रखना या इसे सक्रिय न करना प्रदेश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने की कोशिश है।

इस बयान के बाद जयपुर के राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ साहित्यकारों और पत्रकारों के बीच भी एक नई बहस छिड़ गई है। अब देखना यह है कि भजनलाल सरकार इन आरोपों और सवालों का क्या जवाब देती है।

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